
CJI Surya Kant on Unemployed Youth (AI Image)
CJI Surya Kant on Unemployed Youth: सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने शुक्रवार को एक सुनवाई के दौरान बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कुछ बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच और परजीवी से कर दी। अदालत की यह टिप्पणी उस समय आई जब एक वकील ने खुद को सीनियर एडवोकेट का दर्जा दिए जाने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि सीनियर एडवोकेट का दर्जा अदालत देती है, यह ऐसी चीज नहीं है जिसके पीछे भागा जाए। पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा, “पूरी दुनिया सीनियर बनने के योग्य हो सकती है, लेकिन कम से कम आप इसके हकदार नहीं हैं।”
सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता के सोशल मीडिया पोस्ट और उसके व्यवहार पर भी नाराजगी जताई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि समाज में पहले से ही ऐसे “परजीवी” मौजूद हैं जो लगातार व्यवस्था और संस्थाओं पर हमला करते रहते हैं।
उन्होंने कहा, “कुछ युवा कॉकरोच की तरह होते हैं, जिन्हें कोई रोजगार नहीं मिलता या पेशे में जगह नहीं मिलती। उनमें से कुछ मीडिया बन जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया, आरटीआई एक्टिविस्ट और दूसरे एक्टिविस्ट बन जाते हैं और फिर हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं।” यह टिप्पणी आते ही अदालत कक्ष में माहौल गंभीर हो गया।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी शिक्षा व्यवस्था और वकीलों की डिग्रियों को लेकर भी चिंता जाहिर की। पीठ ने कहा कि कई वकीलों की डिग्रियों की सत्यता पर गंभीर संदेह है और इस मामले में सीबीआई जांच की जरूरत पड़ सकती है।
अदालत ने यह भी कहा कि बार काउंसिल इस तरह के मामलों में कार्रवाई करने से बचती है, क्योंकि उन्हें वोट बैंक की चिंता रहती है।
अदालत की सख्त टिप्पणियों और फटकार के बाद याचिकाकर्ता ने माफी मांग ली। इसके बाद उसने अपनी याचिका वापस लेने का फैसला किया।
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी अब कानूनी और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है। कई लोग इसे न्यायपालिका की व्यवस्था पर बढ़ते हमलों और सोशल मीडिया एक्टिविज्म पर सख्त संदेश के तौर पर देख रहे हैं, जबकि कुछ लोग अदालत द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्दों को लेकर बहस भी कर रहे हैं।
Published on:
16 May 2026 01:47 am
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