
सुप्रीम कोर्ट ने महिला वकीलों की सुविधाओं को लेकर सभी राज्यों और हाई कोर्ट को सख्त निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि जिला, अनुमंडल और तहसील स्तर की हर अदालत में महिला वकीलों के लिए अलग बार रूम बनाया जाए। साथ ही वहां शौचालय और दूसरी जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएं।
कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि किसी भी अदालत में महिला वकीलों की संख्या चाहे जितनी भी हो, उन्हें इन सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकता।मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने यह फैसला सुनाया।
फैसला सुनाते वक्त यह भी कहा गया कि अदालत के निर्देशों से पीछे हटने का कोई सवाल नहीं है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को जरूरत के हिसाब से जमीन और बजट उपलब्ध कराने को भी कहा है। वहीं, हाई कोर्ट की इंफ्रास्ट्रक्चर समितियों को इन सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर तैयार कराने की जिम्मेदारी दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि महिला वकीलों के लिए अलग बार रूम और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है। यह जिम्मेदारी इस आधार पर टाली नहीं जा सकती कि किसी अदालत में महिला वकीलों की संख्या कम है।
कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि देशभर में इन सुविधाओं के लिए एक समान व्यवस्था अपनाई जाए। इससे अलग-अलग राज्यों और अदालतों में उपलब्ध सुविधाओं के बीच अंतर कम करने में मदद मिल सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी को इस मामले में नोडल अधिकारी बनाया है। वह अलग-अलग राज्यों और संबंधित पक्षों से मिलने वाली प्रगति रिपोर्ट को एक जगह जुटाने और निर्देशों के पालन में तालमेल बनाने का काम करेंगे।
यह मामला सारिका त्यागी बनाम भारत सरकार से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा- यही निर्देश है। हम इससे हटना नहीं चाहते।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 2 दिसंबर की तारीख तय की है। इस डेट को सभी राज्य और संबंधित हाई कोर्ट महिला वकीलों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में हुई प्रगति के बार में जानकारी देंगे।