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एंटी-अबॉर्शन रैली में पहुंचे तमिलनाडु स्पीकर, बयान के बाद क्यों घिर गई विजय सरकार?

Tamil Nadu Speaker Anti Abortion Rally: तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष प्रभाकर के गर्भपात विरोधी रैली में शामिल होने से विवाद बढ़ गया है। महिला अधिकार कार्यकर्ताओं और विपक्ष ने सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या यह सरकार की आधिकारिक सोच है।
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Aug 11, 2026
Women activists oppose Prabhakar
सीएम विजय (बाएं) और विधानसभा अध्यक्ष प्रभाकर (Photo-IANS)

Tamil Nadu Abortion Rally Controversy: तमिलनाडु में राजनीतिक सरगर्मियां तेज है। विधानसभा अध्यक्ष प्रभाकर ने एक एंटी-अबॉर्शन (गर्भपात विरोधी) रैली में शिरकत की। अब इसको लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष ने टीवीके सरकार को निशाने पर लिया है। वहीं महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने उनके रुख की आलोचना करते हुए सवाल उठाया है कि क्या यह सरकार की आधिकारिक सोच है?

क्या है पूरा मामला? 

बता दें कि यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब विधानसभा अध्यक्ष प्रभाकर ने 8 और 9 अगस्त को चेन्नई में आयोजित 5वें नेशनल मार्च फॉर लाइफ में मुख्य अतिथि के तौर पर हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम का आयोजन मद्रास-मायलापुर के आर्चडायोसिस की ओर से स्टेला मैरिस कॉलेज में किया गया था। 

आयोजकों के मुताबिक, इसमें 5 हजार से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में गर्भपात के अधिकारों का विरोध करते हुए अजन्मे बच्चे के जीवन और अधिकारों की रक्षा की मांग की गई।

कार्यक्रम के दौरान प्रभाकर ने कथित तौर पर कहा कि जीवन गर्भधारण के साथ शुरू होता है। उन्होंने अजन्मे बच्चे की गरिमा की बात करते हुए कहा कि हर बच्चा ईश्वर का आशीर्वाद है और किसी को भी उसके खिलाफ सोचने या इरादा रखने की बात नहीं करनी चाहिए।

महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने जताई आपत्ति

विधानसभा अध्यक्ष की मौजूदगी और उनके कथित बयानों पर महिला अधिकार कार्यकर्ताओं और संगठनों ने सवाल उठाए हैं। आलोचकों का कहना है कि भारत में गर्भपात कानून के तहत निर्धारित परिस्थितियों में कानूनी है और महिलाओं की प्रजनन स्वतंत्रता को संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है।

महिला अधिकार कार्यकर्ता शालिन मारिया लॉरेंस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रभाकर की आलोचना करते हुए सरकार से भी सवाल किया।

उन्होंने लिखा कि भारत में गर्भपात का अधिकार संवैधानिक संरक्षण के दायरे में आता है और पूछा कि क्या मुख्यमंत्री भी महिलाओं की शारीरिक स्वायत्तता को लेकर विधानसभा अध्यक्ष के विचारों से सहमत हैं।

बीजेपी नेता ने भी उठाए सवाल

बीजेपी नेता नारायणन तिरुपति ने भी विधानसभा अध्यक्ष की रैली में भागीदारी को लेकर सवाल उठाया है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि कार्यक्रम में महिलाओं के अधिकारों के विरोध में नारे लगाए गए और गर्भपात को हत्या बताए जाने जैसे विचार सामने रखे गए।

तिरुपति ने कहा कि भारत में गर्भपात कानून के तहत वैध है और ऐसे कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष की भागीदारी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने इसे महिलाओं के अधिकारों के संदर्भ में गंभीर मुद्दा बताया।

स्वास्थ्य मंत्री ने दी सफाई

इस पूरे विवाद के बीच तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री केजी अरुणराज ने मामले को लेकर संयम बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि विधानसभा अध्यक्ष ने किस संदर्भ में ये टिप्पणियां की थीं और लोगों को उनके बयान का गलत अर्थ नहीं निकालना चाहिए। स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत में गर्भपात मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) एक्ट के तहत नियंत्रित होता है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा कानून के तहत निर्धारित परिस्थितियों में 20 सप्ताह तक गर्भपात कानूनी रूप से कराया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में कई परिस्थितियों में गर्भपात एक आवश्यक चिकित्सा प्रक्रिया हो सकती है।

Updated on:
11 Aug 2026 01:17 pm
Published on:
11 Aug 2026 01:17 pm