
Tamil Nadu Farming Issues: तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में किसानों का अनोखा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। खेती को बचाने के लिए वह अपने अधनंगे शरीर को गर्दन तक नदी की रेत में दबा लिया। यही नहीं कुछ किसान तो नदी में उतरकर जोर-शोर से नारेबाजी की। उनके हाथों में ‘नेशनल साउथ इंडियन रिवर्स इंटर-लिंकिंग फार्मर्स एसोसिएशन’ के झंडे थे। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कह रहे हैं- ‘किसानों को बचाओ’ और ‘मेकेदातु डैम मत बनाओ’।
नेशनल साउथ इंडियन रिवर्स इंटर-लिंकिंग फार्मर्स एसोसिएशन के नेतृत्व में हो रहे इस प्रदर्शन का मकसद कर्नाटक के प्रस्तावित मेकेदातु डैम प्रोजेक्ट का विरोध करना है। किसानों का कहना है कि यदि यह डैम बना, तो तमिलनाडु में लाखों एकड़ खेती योग्य जमीन और सिंचाई व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। किसानों ने विजय सरकार को चेतावनी देते हुए 10 दिनों का अल्टीमेटम दिया है और साफ कहा है कि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज होगा। इस दौरान धरना प्रदर्शन भी जारी रहेगा।
कुछ हफ्ते पहले पीएम मोदी को पत्र लिखकर सीएम विजय ने आग्रह किया था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ कर्नाटक के मेकेदातु बांध परियोजना को रोक दिया जाए। उनका कहना था कि यह परियोजना कावेरी जल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले और कावेरी ट्रिब्यूनल के आदेशों के खिलाफ है।
विजय ने आरोप लगाया कि कर्नाटक सरकार मेकेदातु परियोजना के लिए भूमि पूजन की तैयारी कर रही है, जिससे तमिलनाडु के किसानों में चिंता बढ़ गई है। तब उन्होंने केंद्र सरकार, जल शक्ति मंत्रालय और सेंट्रल वॉटर कमीशन से इस परियोजना को मंजूरी न देने की अपील की थी।
बता दें मेकेदातु डैम प्रोजेक्ट कर्नाटक के रामनगर जिले में प्रस्तावित है। कर्नाटक का दावा है कि इससे बेंगलुरु को पीने का पानी मिलेगा और बिजली उत्पादन भी होगा। करीब 14,000 करोड़ रुपये की लागत वाली इस प्रोजेक्ट से शहर को 4 टीएमसी मतलब कि 4 हजार मिलियन क्यूबिक फीट से अधिक पानी मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, तमिलनाडु का कहना है कि नया जलाशय कावेरी नदी के प्राकृतिक प्रवाह को प्रभावित कर सकता है, जिससे डेल्टा क्षेत्रों में सिंचाई पर असर पड़ेगा। दूसरी ओर, कर्नाटक का दावा है कि परियोजना से तमिलनाडु के हिस्से के पानी में कोई कमी नहीं आएगी। मेकेदातु मुद्दा लंबे समय से कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच राजनीतिक और कानूनी विवाद का विषय बना हुआ है। यही कारण है कि तमिलनाडु जोर-शोर से इसका विरोध कर रहे हैं।