Tarique Rahman New PM of Bangladesh: बांग्लादेश के चुनावी नतीजों को देखकर भारत में टेंशन बढ़ गई है। इस चुनाव में कट्टरपंथियों को पीछे कई चुनाव के मुकाबले अधिक मत मिले हैं। पढ़ें पूरी खबर...
India Bangladesh Relations: बांग्लादेश की राजनीति में 13वें आम चुनाव में ऐसा बदलाव आया है, जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती। संसदीय लोकतंत्र की बहाली के बाद यह पहला मौका है जब इस्लामिक दलों ने न केवल सबसे अधिक सीटें जीती हैं, बल्कि उनके वोट शेयर में भी भारी उछाल आया है। विशेषकर भारत के लिए यह बदलाव चिंता का विषय हो सकता है।
12 फरवरी को हुए 13वें आम चुनाव के नतीजों ने साफ कर दिया है कि देश की चुनावी राजनीति में इस्लामिक ताकतों का कद अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, इस चुनाव में 11 इस्लामिक दलों ने कुल 607 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। नतीजों के विश्लेषण से पता चलता है कि इन मजहबी दलों ने मिलकर कुल 72 सीटों पर कब्जा किया है। इसमें अकेले जमात-ए-इस्लामी ने 68 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया है।
इससे पहले 1991 और 2001 में ये दल अधिकतम 19 सीटें ही जीत पाए थे। वोट प्रतिशत के मामले में इस्लामिक दलों ने इस बार 38% का आंकड़ा पार कर लिया है। अकेले जमात ने ही करीब 31 फीसदी वोट हासिल किए। जिसमें 1991 के बाद से किसी भी चुनाव में यह आंकड़ा कभी 15% से ऊपर नहीं गया था। इन चुनावों में राष्ट्रवादी और अपेक्षाकृत उदार समझे जाने वाला दल बीएनपी करीब 49.97% वोट लेकर सबसे बड़ी पार्टी बन के उभरा है।
जमात और अन्य इस्लामिक दलों का प्रदर्शन
पार्टी चुनाव लड़ा जीत दर्ज
जमात-ए-इस्लामी 228 68 सीटों पर जीत दर्ज की।
खेलाफत मजलिस 20 1
बांग्लादेश खेलाफत मजलिस 34 2
इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश 258 1 सीट (चरमोनाई पीर की पार्टी ने पहली बार खाता खोला)
जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम 5 0 (बीएनपी के साथ गठबंधन के बावजूद)
चुनाव आयोग द्वारा कल जारी पार्टी-वार आंकड़ों ने देश के धर्मनिरपेक्ष हलकों में एक नई बहस छेड़ दी है। क्या बांग्लादेश अब एक नए 'मजहबी राष्ट्रवाद' की ओर बढ़ रहा है?