तेलंगाना के सरकारी स्कूल में मिड-डे मील खाने के बाद 22 बच्चों के बीमार पड़ने का मामला सामने आया है। फिलहाल बच्चों का अस्पताल में इलाज चल रहा है और उनकी स्थिति में सुधार बताया जा रहा है।
सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील के नाम पर बच्चों को खराब और बिना पोषण वाला खाना परोसे जाने के कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। इन घटनाओं के चलते बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव को जानते हुए भी इन्हें लेकर कोई सख्त कदम नहीं उठाए जाते हैं। बच्चे इस भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ते रहते है और प्रशासन आंखें मूंद कर बैठा रहता है। ऐसा ही एक शर्मनाक मामला अब तेलंगाना के संगारेड्डी जिले में सामने आया है। यहां एक प्राइमरी स्कूल में दोपहर का खाना खाने के बाद करीब 22 बच्चे बीमार पड़ गए, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
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पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार स्कूल में बच्चों को दोपहर के खाने में सांभर और चावल परोसे गए थे। खाना खाने के कुछ ही देर बाद करीब 22 बच्चों को उल्टी और पेट में दर्द की शिकायत होने लगी। इसके बाद बच्चों को तुरंत इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। यहां बच्चों का इलाज किया गया जिसके बाद उनकी हालत में सुधार आया है। जानकारी के मुताबिक सभी बच्चों को जल्द ही डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।
नारायणखेड पुलिस के एक अधिकारी ने इस मामले में जानकारी देते हुए बताया कि करीब 22 बच्चों को स्कूल में सांभर और चावल खाने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि अभी सभी बच्चों की हालत में सुधार है और हमें उम्मीद है कि उन्हें आज रात तक अस्पताल से डिस्चार्ज मिल जाएगा। अधिकारी ने यह भी बताया कि उन्हें अभी किसी भी बच्चे के माता-पिता की तरफ से स्कूल प्रशासन के खिलाफ कोई शिकायत नहीं मिली है।
अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या बच्चों को परोसे गए खाने में किसी तरह की गड़बड़ी या खराब सामग्री का इस्तेमाल तो नहीं हुआ था जिसकी वजह से उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसके लिए भोजन की गुणवत्ता और रसोई व्यवस्था की जांच शुरू कर दी गई है। मामले की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि हाल ही में तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले के पास स्थित एक सरकारी स्कूल में भी मिड-डे मील खाने के बाद 33 छात्रों के बीमार होने का मामला सामने आया था। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं से मिड डे मील योजनाओं की निगरानी और फूड सेफ्टी मानकों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।