
Tenant Rights in India: किराएदारों के अधिकारों को लेकर एक अहम फैसला देते हुए केरल हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कोई भी मकान मालिक अपने किराए पर दिए गए घर में बिना अनुमति जबरन प्रवेश नहीं कर सकता है। अदालत ने इस मामले में दोषी पाए गए मकान मालिक को सजा सुनाते हुए लोअर कोर्ट और अपीलीय अदालत के फैसले को बरकरार रखा।
जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि कोई भी व्यक्ति, भले ही वह मकान का मालिक क्यों न हो, किसी दूसरे के वैध कब्जे वाली जगह में गैरकानूनी तरीके से प्रवेश नहीं कर सकता। अदालत ने कहा कि मालिकाना हक के नाम पर कानून तोड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती, खासकर तब जब प्रवेश का उद्देश्य किसी गैरकानूनी काम को अंजाम देना हो।
यह मामला उस समय सामने आया जब एक मकान मालिक पर आरोप लगा कि उसने किराएदार के घर में जबरन घुसकर उसका सामान बाहर फेंक दिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, किराएदार ने जिस कमरे को किराए पर लिया था, उसमें मकान मालिक ने बिना अनुमति प्रवेश किया और उसके घरेलू सामान को बाहर निकाल दिया, जिससे आर्थिक नुकसान भी हुआ।
लोअर कोर्ट ने मकान मालिक को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 454 (अपराध के इरादे से घर में घुसना) और धारा 427 (संपत्ति को नुकसान पहुंचाना) के तहत दोषी ठहराया है।
ट्रायल कोर्ट ने उसे एक साल की सजा और जुर्माना लगाया, जबकि अपीलीय अदालत ने सजा में बदलाव करते हुए तीन महीने की सजा और किराएदार को 15 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।
मामला हाई कोर्ट पहुंचने पर अदालत ने सभी सबूतों और गवाहों के बयानों का अध्ययन किया और पाया कि निचली अदालतों का फैसला सही था। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिर्फ मकान का मालिक होना किसी व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं बनाता। अगर वह किराएदार के अधिकारों का उल्लंघन करता है, तो उसे सजा भुगतनी होगी।
यह फैसला किराएदारों के अधिकारों की रक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह साफ संदेश जाता है कि मकान मालिक भी कानून के दायरे में हैं और वे मनमाने तरीके से किराएदार की निजी जगह में दखल नहीं दे सकते।