इराक से लौटी महिला ने दावा किया कि पंजाब की करीब 25 महिलाएं अभी भी इराक में फंसी हुई है। उसने कहा-ट्रैवल एजेंट तनख्वाह वाली नौकरी का झांसा देकर महिलाओं को विदेश भेज रहा है।
पंजाब में ट्रैवल एजेंट द्वारा अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी का झांसा देकर महिलाओं को विदेश भेजने का मामला सामने आया है। दरअसल, इन महिलाओं में राज्यसभा सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल के हस्तक्षेप के बाद एक महिला इराक से लौटी है। महिला ने खुलासा किया कि अभी भी करीब 25 महिलाएं इराक में फंसी हुई हैं।
इराक से लौटी महिला ने अपनी आपबीती सुनाई है। उसने कहा कि उसे सिलाई का काम दिलाने का वादा करके लेकर गए थे, लेकिन वहां पर घरेलू नौकर के रूप में काम करने के लिए मजबूर किया गया। साथ ही कहा कि उसे साप्ताहिक छुट्टियां और परिवार से संपर्क करने के लिए मोबाइल का उपयोग करने की अनुमति देने का वादा किया था, लेकिन वहां पर सब कुछ उल्टा था।
महिला ने नियोक्ता पर हमला करने का भी आरोप लगाया है। उसने कहा कि जब मैंने इसका विरोध किया तो उसने तब तक मुझे पीटा जब तक उसकी छड़ी टूटी नहीं। लगातार दुर्व्यवहार और हिंसा से मेरे मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ा और कई महीनों तक अवसाद में रही।
महिला ने बताया कि उसने सोशल मीडिया की मदद से राज्यसभा सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल से मदद की गुहार लगाई और उनके हस्तक्षेप के बाद वह भारत लौटी है। उसने बताया कि भारत लौटने के बाद करीब एक महीने तक सदमे में रही।
महिला ने बताया कि वह इराक में बिताए दिनों को कभी नहीं भूल सकती है। उसने आरोप लगाया कि ट्रैवल एजेंट ने ग्रामीण इलाकों में एक नेटवर्क बनाया है और गरीब लड़कियों को "अच्छी नौकरी" का झांसा देकर विदेश भेज रहा है।
महिला ने राज्यसभा सांसद से मिलकर मदद करने के लिए उन्हें धन्यवाद कहा। सांसद ने महिला को अन्य फंसी हुई महिलाओं के लिए आवाज़ उठाने के लिए कहा। उन्होंने चेतावनी दी कि मानव तस्करी के ऐसे नेटवर्क ग्रामीण इलाकों में खतरनाक रूप से फैल गए हैं, जिससे कमज़ोर लड़कियां विदेशों में अकल्पनीय पीड़ा झेल रही हैं।
राज्यसभा सांसद ने कहा- अब तक लौटी हर लड़की इस बात की पुष्टि करती है कि कई और लड़कियां अभी भी विदेश में फँसी हुई हैं, जो दर्शाता है कि यह रैकेट कितना व्यापक और संगठित हो चुका है। उन्होंने कहा- यह सिर्फ एक लड़की की कहानी नहीं है, बल्कि उन सभी भारतीय बेटियों की कहानी है जो एजेंटों के झूठे वादों का शिकार हो रही हैं और खाड़ी देशों में अकल्पनीय दुर्व्यवहार का शिकार हो रही हैं।