
TMC Rebel MPs: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़े बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं। कूच बिहार से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने दावा किया है कि नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के 20 में से 17 सांसद अक्टूबर में दुर्गा पूजा के आसपास भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो सकते हैं। वहीं, पूर्व क्रिकेटर व सांसद यूसुफ पठान समेत अल्पसंख्यक समुदाय के तीन सांसद पार्टी की औपचारिक सदस्यता न लेकर बाहर से NDA को समर्थन देंगे।
जगदीश बसुनिया के अनुसार, सभी 17 सांसदों ने संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत अयोग्य घोषित होने से बचने के लिए एक साथ BJP में शामिल होने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि 17 सांसद एक साथ BJP में शामिल हो रहे हैं, चूंकि 20 सदस्यों वाले ग्रुप के दो-तिहाई से ज्यादा सदस्य एक साथ पाला बदल रहे हैं, इसलिए उन पर दल-बदल विरोधी कानून लागू नहीं होगा। नियमों के तहत, 20 सदस्यों वाले समूह को अयोग्यता से बचने के लिए कम से कम दो-तिहाई यानी 14 सांसदों की सहमति जरूरी होती है, जबकि यहां 17 सांसद तैयार हैं।
बसुनिया ने बताया कि NCPI के तीन अल्पसंख्यक सांसद औपचारिक रूप से BJP में शामिल नहीं होंगे। इनमें बहरामपुर से सांसद यूसुफ पठान, जंगीपुर से सांसद खलीलुर रहमान और मुर्शिदाबाद से सांसद अबू ताहिर खान शामिल हैं। बसुनिया के अनुसार, इन तीनों नेताओं ने अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में स्थानीय राजनीतिक और प्रशासनिक स्थितियों पर विचार करने के बाद यह फैसला किया। वे बाहर से NDA का समर्थन करेंगे और उन्हें केंद्र में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां या विभाग सौंपे जा सकते हैं।
जगदीश बसुनिया का यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में कूच बिहार के सिताई में अपने पुश्तैनी घर लौटने पर उन्हें और उनकी पत्नी संगीता रॉय को कड़े विरोध का सामना करना पड़ा था। पार्टी बदलने से नाराज स्थानीय लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था और इस दौरान उनके आवास के निकट स्थित एक तृणमूल कार्यालय में आगजनी भी हुई थी।
गौरतलब है कि 14 जून को डॉ. काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई में TMC के 20 बागी लोकसभा सांसदों के एक गुट ने NCPI के साथ जाकर NDA का समर्थन करने का फैसला किया। अब यह गुट BJP में पूरी तरह से विलय की ओर बढ़ रहा है। संसद में इन सांसदों को NCPI गुट के तौर पर मान्यता दी गई है और इन्होंने NDA की संसदीय गतिविधियों में भी हिस्सा लिया है।
वहीं, TMC ने इन सांसदों की सदस्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। पार्टी का तर्क है कि ये सांसद TMC के चुनाव चिह्न पर चुनाव जीते थे और किसी दूसरे राजनीतिक संगठन में शामिल होने का उनका कदम दल-बदल विरोधी कानूनों के दायरे में आता है।