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क्या है यह जाली हस्ताक्षर मामला ? TMC के लिए क्यों बनी यह फजीहत की वजह ?

TMC Signgate Scam:बंगाल चुनाव 2026 में करारी हार के बाद ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी अब विधानसभा दस्तावेजों में हुए जाली हस्ताक्षर घोटाले के कारण भारी संकट में घिर गई है।

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Jun 02, 2026
Mamata Banerjee
ममता बनर्जी (फोटो- पीटीआई एक्स पोस्ट)

TMC Internal Crisis : पश्चिम बंगाल में 15 साल की सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस अपने इतिहास के सबसे बड़े संकटों में घिर गई है। इससे पार्टी नेता ममता बनर्जी बहुत दबाव व तनाव में हैं। कारण यह है कि विधानसभा में पेश किए गए आधिकारिक दस्तावेजों पर उनकी पार्टी के ही कई विधायकों के हस्ताक्षर फर्जी होने का आरोप लगा है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है। 'साइनगेट' नाम से मशहूर हो चुके इस मामले की सीआईडी जांच कर रही है। इस मामले में जहां दो विधायकों को पार्टी से निकाला जा चुका है, वहीं टीएमसी के दिग्गज नेता भी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं।

आखिर क्या है यह जाली हस्ताक्षर घोटाला ?

साल 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद विपक्ष के नेता और पार्टी के चीफ व्हिप की नियुक्ति के लिए पश्चिम बंगाल विधानसभा में कुछ दस्तावेज जमा किए गए थे। इन्हीं दस्तावेजों को लेकर यह पूरा बवाल खड़ा हुआ है। दावा किया जा रहा है कि इन कागजातों पर कई टीएमसी विधायकों के दस्तखत या तो फर्जी हैं या उनकी मर्जी के बिना किए गए हैं।

उनके विधायकों ने ही सवाल उठा दिए

यह मामला तब तूल पकड़ गया जब टीएमसी के वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष बनाने के समर्थन वाले पत्र पर ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा नामक विधायकों ने सवाल उठा दिए। उन्होंने हस्ताक्षरों की असलियत पर शक जताया, जिसके बाद पश्चिम बंगाल की अपराध जांच शाखा (सीआईडी) ने मामले की विधिवत जांच शुरू कर दी। इसके बाद विधानसभा सचिव की तरफ से एफआईआर दर्ज कराई गई। अब जांच अधिकारी संदिग्ध दस्तावेजों से जुड़े विधायकों के सैंपल सिग्नेचर ले रहे हैं और उनके बयान दर्ज कर रहे हैं।

TMC के लिए क्यों बनी यह फजीहत की वजह ?

यह घटनाक्रम टीएमसी के लिए बेहद गंभीर है क्योंकि यह पार्टी के भीतर पनप रहे भारी असंतोष को उजागर करता है। लंबे समय से ममता बनर्जी के सख्त अनुशासन वाली पार्टी में अब दरारें साफ दिखने लगी हैं। जब विधायकों (ऋतब्रत और संदीपन) ने सार्वजनिक तौर पर हस्ताक्षरों पर सवाल उठाए, तो पार्टी ने उन्हें अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में तुरंत बाहर का रास्ता दिखा दिया।

यह विवाद महज कागजी नहीं, बल्कि पार्टी के नेतृत्व पर बड़ा सवाल

मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सीआईडी ने टीएमसी के कद्दावर नेता और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को भी पूछताछ के लिए बुलाया है। चुनावी हार के तुरंत बाद यह विवाद महज एक कागजी गलती नहीं, बल्कि पार्टी के आंतरिक अनुशासन और नेतृत्व की साख पर बड़ा सवाल बन गया है।

2026 चुनाव में हार के बाद बढ़ा संकट

यह 'साइनगेट' विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब टीएमसी को हाल ही में संपन्न 2026 के विधानसभा चुनावों में करारी शिकस्त मिली है। इस हार के साथ ही राज्य में टीएमसी का 15 वर्षों का एकछत्र राज खत्म हो गया और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने प्रचंड जीत के साथ बंगाल में अपनी पहली सरकार बनाई।

फर्जी हस्ताक्षर के आरोपों ने पार्टी के अंदर गुटबाजी को और हवा दे दी

साल 2011 से बंगाल की सियासत पर राज करने वालीं ममता बनर्जी के लिए यह नतीजे एक तगड़े झटके की तरह थे। सत्ता छिनने के बाद से ही पार्टी को कुशासन, भ्रष्टाचार, संगठन की कमजोरियों और चुनाव के बाद की अशांति जैसे मुद्दों पर लगातार आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। अब फर्जी हस्ताक्षर के आरोपों ने पार्टी के अंदर गुटबाजी को और हवा दे दी है। बैठकों से विधायकों का नदारद रहना और नेताओं की आपसी कलह यह बता रही है कि सत्ता जाने के बाद पार्टी को एकजुट रखना कितना मुश्किल हो रहा है।

इस मामले में अब आगे क्या होगा ?

फिलहाल इस मामले में सीआईडी की तफ्तीश जारी है। जांच दल लगातार बड़े नेताओं और विधायकों के बयान दर्ज कर रहा है। जांच का मुख्य लक्ष्य यह पता लगाना है कि हस्ताक्षरों में हेराफेरी किसने की, इसके पीछे कौन जिम्मेदार हो सकता है, और क्या विधानसभा दस्तावेजों को तैयार करने में कोई आपराधिक साजिश रची गई थी।

टीएमसी को इसका भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है

बहरहाल, राजनीतिक नजरिये से देखा जाए तो टीएमसी को इसका भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। चुनाव हारने के ठीक बाद फूटे इस घोटाले ने पार्टी की अंदरूनी कलह को उजागर कर दिया है। विपक्ष की भूमिका में रहते हुए अपनी पार्टी को दोबारा खड़ा करने की कोशिश कर रहीं ममता बनर्जी के लिए यह विवाद यकीनन सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बना रहेगा।