
TMC Symbol Dispute: तृणमूल कांग्रेस और उसके आधिकारिक चुनाव चिह्न पर नियंत्रण को लेकर ऋतब्रत बनर्जी के गुट और ममता बनर्जी के गुट के बीच चल रही खींचतान के बीच भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 17 सितंबर को दोपहर 3:00 बजे नई दिल्ली के निर्वाचन सदन में आमने-सामने की सुनवाई तय की है। आयोग ने एक औपचारिक पत्र जारी कर ऋतब्रत बनर्जी को पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
ECI सचिव अश्वनी कुमार मोहल द्वारा 16 सितंबर को जारी एक आधिकारिक पत्र में कहा गया है कि यह सुनवाई ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के संबंध में आयोग को प्राप्त अभ्यावेदनों के सिलसिले में हो रही है। पत्र में अनुरोध किया गया है कि प्रतिनिधिमंडल के सभी पांच सदस्यों के नाम और उनकी गाड़ियों का विवरण ईमेल के माध्यम से उपलब्ध कराया जाए ताकि आवश्यक व्यवस्था की जा सके। इसमें आयोग द्वारा 12 सितंबर, 2026 को भेजे गए एक पिछले पत्र का भी जिक्र किया गया है।
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव 6 अक्टूबर, 2026 को होने हैं। दोनों सीटों के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। दोनों गुटों ने तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक चुनाव चिह्न का उपयोग करते हुए अपने-अपने प्रत्याशी मैदान में उतार दिए हैं। बुधवार को दावेदारी के समर्थन में दस्तावेज जमा कराने और नामांकन का अंतिम दिन था।
गुरुवार को नामांकन पत्रों की जांच होनी है, जिसे देखते हुए संभावना है कि चुनाव आयोग उपचुनाव के मद्देनजर कोई अंतरिम व्यवस्था कर सकता है। हालांकि, जब तक कमीशन कोई अंतिम आदेश जारी नहीं करता, तब तक यह साफ़ नहीं है कि दोनों गुटों को किस नाम और चुनाव चिह्न के साथ चुनाव लड़ने की इजाज़त मिलेगी।
यह विवाद 22 जून 2026 को तब उपजा, जब विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने एक बैठक बुलाई और तृणमूल कांग्रेस के लिए एक नई राष्ट्रीय कार्यकारी समिति बनाने की घोषणा की, जिसका अध्यक्ष अरूप रॉय को चुना गया। ऋतब्रत बनर्जी का कहना था कि पार्टी के संविधान के अनुच्छेद 20 के अनुसार, राष्ट्रीय कार्यकारी समिति का पुनर्गठन हर तीन साल में किया जाना चाहिए। फरवरी 2022 में बनी पिछली समिति का कार्यकाल फरवरी 2025 में खत्म हो गया था और उसे ठीक से रिन्यू नहीं किया गया था। उनका तर्क था कि 22 जून की बैठक पार्टी संविधान के नियमों के अनुसार बुलाई गई थी।