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Supreme Court: फर्जी डॉक्टरों पर लगाम के लिए सुप्रीम कोर्ट में PIL, कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार

Supreme Court PIL dismissal: सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल डिग्री और डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन के लिए फर्जीवाड़ा-रोधी व्यवस्था तंत्र बनाने की मांग वाली PIL खारिज कर दी। पीठ ने याचिकाकर्ता को बार-बार PIL दाखिल करने पर नसीहत भी दी।
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Goa Moves Supreme Court Over Tarun Tejpal.

सुप्रीम कोर्ट (Photo- IANS)

Fake Medical Degrees: सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में मेडिकल डिग्री और डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन की जांच के लिए एक समान और फर्जीवाड़ा-रोधी व्यवस्था बनाने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया। याचिका वकील नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने दायर की थी। मामले की सुनवाई जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने की। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को बार-बार जनहित याचिकाएं दायर करने को लेकर भी नसीहत दी। पीठ ने टिप्पणी की कि वह लगभग हर सप्ताह एक PIL दाखिल कर रहे हैं और अदालत में इस तरह याचिकाओं का बोझ नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।

याचिका में क्या मांग की गई थी?

याचिका भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई थी। इसमें अनुच्छेद 14 और 21 के तहत मौलिक अधिकारों के संरक्षण और नेशनल मेडिकल कमीशन एक्ट, 2019 के तहत मौजूद कानूनी व्यवस्था को लागू करने के निर्देश देने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में सुरक्षित और सक्षम चिकित्सा उपचार का अधिकार भी शामिल है। ऐसे में फर्जी, संदिग्ध या सत्यापन के बिना मौजूद मेडिकल योग्यता वाले लोगों को डॉक्टर के रूप में काम करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

नेशनल मेडिकल रजिस्टर का भी किया गया जिक्र

याचिकाकर्ता ने कहा था कि नेशनल मेडिकल रजिस्टर सिर्फ एक ऑनलाइन डेटाबेस नहीं है, बल्कि डॉक्टर की योग्यता और रजिस्ट्रेशन को लेकर मरीजों, अस्पतालों और सरकारी एजेंसियों के भरोसे का अहम आधार है। याचिकाकर्ता ने 26 फरवरी 2026 को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और नेशनल मेडिकल कमीशन को अपनी मांगों को लेकर पत्र भेजा था। इसके बाद 31 मई 2026 को रिमाइंडर भी भेजा गया। याचिका में दावा किया गया था कि इन पत्रों का जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

याचिका में इन मामलों का था जिक्र

याचिका में अलग-अलग राज्यों में सामने आए कथित फर्जी डिग्री और पेशेवर योग्यता से जुड़े मामलों का भी हवाला दिया गया था। इनमें उत्तर प्रदेश में मई 2025 में हापुड़ की मोनाड यूनिवर्सिटी में STF की कथित कार्रवाई का जिक्र था, जहां 1,372 फर्जी डिग्री/मार्कशीट और 262 कथित नकली प्रमाणपत्र बरामद होने की बात कही गई थी। इसके अलावा केरल में कथित फर्जी प्रमाणपत्र नेटवर्क, दिल्ली में फर्जी फार्मेसी रजिस्ट्रेशन से जुड़े मामले और राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप की ओर से मार्च 2026 में जांच किए गए कथित फर्जी FMGE प्रमाणपत्र और मेडिकल रजिस्ट्रेशन नेटवर्क का भी उल्लेख किया गया था।

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