
कोलकाता पुलिस वॉलंटियर्स के भगवा ड्रेस पर विवाद (AI Photo)
Kunal Ghosh on Kolkata Police Volunteer Uniform: पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान कोलकाता पुलिस द्वारा तैनात किए जाने वाले लगभग 20,000 सिविक वॉलंटियर्स के लिए प्रस्तावित भगवा यूनिफॉर्म को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष ने पुलिस के इस कदम का विरोध किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस बल को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की शैली में ढालने के लिए बड़े पैमाने पर जनता के पैसे की बर्बादी की जा रही है।
कुणाल घोष ने वॉलंटियर्स के लिए भगवा रंग की फुल स्लीव टी-शर्ट और टोपी खरीदने की कोलकाता पुलिस की योजना पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि पुलिस बल की अपनी स्वतंत्र और निष्पक्ष पहचान होती है। जहां सनातन परंपरा में भगवा रंग त्याग, सहनशीलता और आध्यात्मिक साधना का पवित्र प्रतीक है, वहीं BJP इसका इस्तेमाल पूरी तरह से अपने एजेंडे और राजनीति के लिए करती है।
कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि पुलिस पहले से ही BJP कैडर की तरह व्यवहार कर रही है और अब नई वर्दी बनाकर उन्हें पार्टी की जर्सी पहना दी गई है। उन्होंने दावा किया कि कड़ी मेहनत से कमाए गए जनता के पैसे और भारी राजस्व का दुरुपयोग इन नई पोशाकों को बनाने में किया जा रहा है।
शिक्षा संस्थानों के मैनेजमेंट पर सवाल उठाते हुए कुणाल घोष ने कहा कि बीजेपी ने पहले कहा था कि किसी भी राजनीतिक नेता को शिक्षा संस्थानों की गवर्निंग बॉडीज का हिस्सा नहीं होना चाहिए। लेकिन असलियत यह है कि कॉलेजों के लिए बनी कमेटियों की लिस्ट में सिर्फ बीजेपी विधायकों को ही शामिल किया जा रहा है। इसके अलावा, पार्टी इन पदों पर अपने नेताओं और करीबी लोगों को नियुक्त कर रही है, जो बंगाल में उच्च शिक्षा संस्थानों के शैक्षणिक माहौल पर बुरा असर डालेगा।
TMC के चुनाव चिह्न को लेकर चुनाव आयोग में चल रही सुनवाई पर कुणाल घोष ने कहा कि इसका तृणमूल कांग्रेस पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के राजनीतिक करियर के दौरान कांग्रेस पार्टी ने तीन अलग-अलग चुनाव चिह्नों का इस्तेमाल किया, फिर भी उन्हें जनता का अटूट समर्थन मिलता रहा। इसी तरह, कम्युनिस्ट पार्टी का भी बंटवारे से पहले एक अलग चुनाव चिह्न था।
कुणाल घोष ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं और आम जनता का ममता बनर्जी के साथ सीधा और अटूट भावनात्मक जुड़ाव है। तृणमूल प्रमुख जो भी चुनाव चिह्न अपनाएंगी, वही कार्यकर्ताओं के लिए पार्टी की पहचान बन जाएगा, क्योंकि लोकतंत्र में लाइन वहीं से शुरू होती है जहां ममता बनर्जी खड़ी होती हैं।
Updated on:
16 Sept 2026 07:49 pm
Published on:
16 Sept 2026 07:49 pm
