राष्ट्रीय

Judge molesting rape survivor: जज से न्याय मांगने कोर्ट पहुंची रेप पीड़िता, वही करने लगा छेड़खानी, अब पद से हटाया गया

रेप पीड़िता अपना बयान दर्ज कराने के लिए जज के चैंबर में पहुंची तो जज उसे न्याय दिलाने की जगह खुद ही गलत तरीके से छूने लगा। उसने जब आपत्ति जताई तो कहा कि जज को रेप के मामलों में ऐसा व्यवहार करना पड़ता है।

2 min read

पिछले सप्ताह अपने चैंबर में एक बलात्कार पीड़िता से छेड़छाड़ के आरोप के बाद त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने धलाई जिले के कमालपुर के प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट बिश्वतोष धर के खिलाफ कार्रवाई की है। राज्य के कानून विभाग के अधिकारियों ने बुधवार को पुष्टि की कि एचसी ने मजिस्ट्रेट बिश्वतोष धर को "बंद" कर दिया है और उन्हें बिना अनुमति के स्टेशन नहीं छोड़ने का निर्देश दिया है। कानूनी शब्दों में, "समापन" का तात्पर्य किसी अधिकारी को बिना किसी असाइनमेंट के एक अलग स्थान पर रखना है। इस मामले में जज धर को हाईकोर्ट से अटैच कर दिया गया है।

जज पर यह आरोप 23 वर्षीय बलात्कार पीड़िता की ओर से लगाया गया है। पीड़िता ने बताया कि जब वह सीआरपीसी की धारा 164 के तहत अपना बयान दर्ज कराने के लिए उसके कक्ष में गई थी तो धर ने उसे अनुचित तरीके से छुआ था। उसने यह आरोप लगाया था कि 13 फरवरी को उसके घर में 26 वर्षीय के एक व्यक्ति ने उसके साथ बलात्कार किया था।महिलाओं ने पुलिस को बताया कि धर ने उन्हें चेतावनी दी थी कि अगर उन्होंने बात नहीं मानी तो मामला उनके खिलाफ चला जाएगा। वह कुछ ही मिनटों में बिना कोई बयान दिए चैंबर से भागने में सफल रही।

जज के खिलाफ बार एसोसिएशन में की थी शिकायत

रेप पीड़िता के पति ने कमालपुर बार एसोसिएशन के सचिव के पास आपनी शिकायत दर्ज कराई जिसमें यह आरोप लगाया गया कि जज धर ने उनकी पत्नी से छेड़छाड़ की और जज ने खुद की गलीज हरकतों को उचित भी ठहराया। जज के हवाला देते हुए पति ने बताया कि उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों को बलात्कार के मामलों में बयान दर्ज करते समय इस तरह से व्यवहार करना पड़ता है। जज के मुंह से ऐसी बात सुनकर वह रोने लगी। जज ने उसे बाहर जाकर बैठने को कहा। पति ने जज पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर जज का चरित्र ऐसा होगा तो लोगों को न्याय कैसे मिलेगा?

16 फरवरी को दर्ज हुआ था मामला

कमालपुर थाना पुलिस ने आरोपों के आधार पर 16 फरवरी को मामला दर्ज किया। महिला ने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश को अपनी आपबीती बताते हुए एक हलफनामा भी सौंपा। रिपोर्ट के मुताबिक, रजिस्ट्रार (सतर्कता) जेएम मुरासिंघ ने मंगलवार को कमालपुर अदालत का दौरा किया और मामले के संबंध में कर्मचारियों, अधिवक्ताओं और न्यायिक अधिकारियों से बातचीत की। धलाई जिला और सत्र न्यायाधीश गौतम सरकार के नेतृत्व में न्यायाधीशों की तीन सदस्यीय टीम ने जांच शुरू की है। उन्होंने जानकारी इकट्ठा करने और धार के व्यवहार और आचरण का आकलन करने के लिए साथी न्यायिक अधिकारियों, वकीलों और अदालत के कर्मचारियों के साथ भी बातचीत की।

यह भी पढ़ें - देश में पहली बार बन रहा है लिव-इन रिलेशनशिप कानून, अभिभावक की मंजूरी जरूरी, जानिए कितना होगा जेल और जुर्माना

Published on:
22 Feb 2024 03:19 pm
Also Read
View All