1 मई 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

चुनाव आयोग की सख्ती का दिखा असर, 483 ट्रांसफर के जरिए बदली बंगाल चुनाव की तस्वीर, हिंसा में आई कमी

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में आयोग की सख्ती के चलते हिंसा में कमी आई। आखिर कैसे किया आयोग ने ये सब, पढ़ें पूरी खबर...

3 min read
Google source verification

चुनाव आयोग (IANS)

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal elections) में इस बार हिंसा पर लगाम लग गई। जहां पहले चुनाव के नाम पर खून-खराबा, गोलीबारी और मौतें आम बात थी, वहीं इस बार चुनाव आयोग की सख्ती और नई रणनीति ने माहौल बदल दिया। कुछ जगहों पर छोटी-मोटी घटनाएं जरूर हुईं, लेकिन किसी की जान नहीं गई। वरिष्ठ चुनाव अधिकारियों का कहना है कि केंद्रीय बलों की मदद और सख्त नजर रखने से असामाजिक तत्वों को काबू में रखा गया।

पुरानी हिंसा की याद

2020 के बाद से बंगाल में चुनावी हिंसा दूसरे किसी भी राज्य से ज्यादा रही है। ACLED नाम की संस्था के आंकड़ों के मुताबिक, यहां 300 से ज्यादा घटनाएं हुईं और 50 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। 2021 के चुनाव में सीतलकुची में केंद्रीय बलों की गोलीबारी में चार लोगों की मौत हो गई थी। नॉर्थ 24 परगना, कोलकाता और कूचबिहार जैसे जिलों में सबसे ज्यादा हिंसा देखी गई थी। इस बार दो चरणों वाले चुनाव में ऐसी बड़ी घटनाएं नहीं हुईं।

गुंडों पर सख्ती से एक्शन

चुनाव से दो दिन पहले ही चुनाव आयोग ने असामाजिक तत्वों पर शिकंजा कस दिया। राज्य पुलिस ने कई लोगों को नजरबंद कर लिया, बाकियों को सख्त चेतावनी दी गई। अधिकारियों ने साफ कहा कि इस बार हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "हमने गुंडों में डर पैदा कर दिया। केंद्रीय बलों की मदद से इलाकों पर काबू पाया गया।"

पुलिस और प्रशासन को भी खुली छूट दी गई ताकि वे बिना डर के कार्रवाई कर सकें। बाइक रैलियों पर 48 घंटे का बैन लगा दिया गया। दोपहिया वाहनों पर सुबह 6 से शाम 6 बजे तक रोक लगाई गई क्योंकि बाइक पर घूमकर धमकी देना यहां आम बात थी। कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुरू में इसे रद्द किया, बाद में 12 घंटे का बैन रखा और जरूरी सेवाओं को छूट दी।

अधिकारी बदलाव और स्थानांतरण

इस चुनाव में सबसे ज्यादा अधिकारी स्थानांतरण हुए। बंगाल में 483 अधिकारियों को बदला गया, जबकि असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी जैसे राज्यों में कुल 23 ही ट्रांसफर हुए। अक्सर पुलिस वाले स्थानीय नेताओं से गलत संबंध बना लेते थे, इसलिए बार-बार ट्रांसफर करके उन्हें रोका गया। एक सीनियर आईएएस अधिकारी ने कहा, "पुलिस और प्रशासन को फ्री हैंड दिया गया ताकि वे बिना किसी दबाव के काम कर सकें।"

जब्ती का नया रिकॉर्ड

चुनाव आयोग ने अवैध प्रलोभन यानी नकदी, शराब, सोना और अन्य सामान की भारी जब्ती की। इस बार 510 करोड़ रुपये से ज्यादा की चीजें जब्त हुईं, जो 2021 के 339 करोड़ से काफी ज्यादा है। इससे साफ है कि पैसे और मुफ्तखोरी से वोटरों को प्रभावित करने की कोशिशों पर भी नकेल कसी गई।

टेक्नोलॉजी और निगरानी

चुनाव आयोग ने इस बार आधुनिक तकनीक का खूब इस्तेमाल किया। केंद्रीय बलों, माइक्रो-ऑब्जर्वर और राज्य पुलिस को बॉडी कैमरे दिए गए। हर पोलिंग बूथ के अंदर और बाहर कैमरे लगाए गए। वाहनों में भी कैमरे थे। ये सब AI से लैस थे। अगर कहीं असामान्य भीड़ दिखती तो कंट्रोल रूम को तुरंत अलर्ट जाता और एक मिनट में संबंधित अधिकारी को सूचना पहुंच जाती। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त फोर्स भेज दी जाती।

मेमोरी कार्ड निकालने का काम सिर्फ डेटा कलेक्शन सेंटर पर असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर की मौजूदगी में होता था। इससे पारदर्शिता बढ़ी। जानकार अधिकारियों की भूमिकाइस बार प्रक्रिया की कमान उन अधिकारियों के हाथ में थी जो बंगाल को अच्छी तरह जानते थे। स्पेशल ऑब्जर्वर सुब्रत गुप्ता और चीफ इलेक्शन ऑफिसर मनोज अग्रवाल दोनों राज्य की भूगोल और जनसांख्यिकी से वाकिफ थे। पहले अक्सर बाहर के अधिकारी आते थे, जो लोकल मसलों को नहीं समझ पाते थे। इस बदलाव ने भी अच्छा असर दिखाया।

चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने कहा कि मतदाताओं के बीच विश्वास जगाने के प्रयास भी कामयाब रहे। सीईओ मनोज अग्रवाल ने चुनाव की सफलता का श्रेय बंगाल की जनता को दिया, जबकि सुब्रत गुप्ता ने वोटर लिस्ट की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को सबसे चुनौतीपूर्ण बताया।कुल मिलाकर, सख्ती, तकनीक, सही अधिकारियों की तैनाती और केंद्रीय बलों की मदद से बंगाल के चुनाव इस बार अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रहे। हालांकि चुनौतियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं, लेकिन शुरुआत अच्छी हुई है।

बड़ी खबरें

View All

राष्ट्रीय

ट्रेंडिंग