तमिलनाडु में चुनावी मौसम में अभिनेता से नेता बने विजय की सुरक्षा को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया। उनकी पार्टी तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को चिट्ठी लिखी, लेकिन उसमें हुई गलती ने पूरी पार्टी को शर्मिंदगी में डाल दिया।
तमिलनाडु में चुनावी मौसम में एक नया बवाल खड़ा हो गया है। इस बार मामला है अभिनेता से नेता बने विजय की सुरक्षा का। उनकी पार्टी तमिलागा वेट्री कड़गम यानी टीवीके ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को चिट्ठी लिखी, लेकिन उस चिट्ठी में ऐसी गलती हो गई जिसने पूरी पार्टी को शर्मिंदगी में डाल दिया।
विजय ने 30 मार्च को पेरंबूर विधानसभा सीट से अपना नामांकन दाखिल किया। इसके बाद उन्होंने पेरंबूर, कोलाथूर और विल्लिवाक्कम में चुनाव प्रचार करने का प्लान बनाया था। पार्टी का कहना है कि सभी जरूरी इजाजतें ली गई थीं और पूरी तैयारी की गई थी।
लेकिन विजय ने बीच में ही प्रचार रोक दिया। पार्टी का आरोप है कि पुलिस सुरक्षा नाकाफी थी। वो पेरंबूर और कोलाथूर में तो गए लेकिन विल्लिवाक्कम का दौरा आखिरी वक्त पर रद्द करना पड़ा।
विजय को सरकार की तरफ से Y कैटेगरी की सुरक्षा मिली हुई है। लेकिन उनकी पार्टी का कहना है कि जमीन पर हालात कुछ और ही थे। भीड़ को संभालने के लिए और किसी खतरे से बचाने के लिए जितनी पुलिस चाहिए थी, उतनी थी ही नहीं।
सुरक्षा की कमी का मामला उठाते हुए टीवीके ने पहले तमिलनाडु के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराई। फिर पार्टी के कार्यकारी सदस्य सी टी आर निर्मल कुमार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को एक विस्तृत चिट्ठी भेजी जिसमें पूरी बात रखी गई। गृह मंत्री अमित शाह को लिखी इस चिट्ठी में मांग की गई कि विजय की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं।
जब यह चिट्ठी सार्वजनिक हुई तो लोगों ने देखा कि इसमें अजय कुमार भल्ला को केंद्रीय गृह सचिव लिखा गया है। लेकिन अजय कुमार भल्ला अभी गृह सचिव नहीं हैं। वो इस वक्त मणिपुर के राज्यपाल हैं।
इसका मतलब है कि विजय की पार्टी ने जिस अफसर का नाम लिखकर चिट्ठी भेजी, वो शख्स उस पद पर है ही नहीं। यह एक बुनियादी गलती है जो किसी भी राजनीतिक पार्टी के लिए शोभा नहीं देती।
राजनीतिक जानकारों ने इस पर सवाल उठाए हैं कि अगर चिट्ठी लिखने से पहले इतनी बेसिक जानकारी नहीं जांची गई तो पार्टी की तैयारी पर सवाल तो उठेगा ही।
पार्टी की तरफ से इस गलती पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। जबकि विरोधी इस मुद्दे को जोरशोर से उठा रहे हैं।
अब सवाल यह है कि जो पार्टी खुद एक नेता की सुरक्षा के लिए सही अफसर का नाम तक नहीं जानती, उसकी चिट्ठी पर गृह मंत्रालय कितनी गंभीरता से ध्यान देगा।