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मार्को रुबियो के 4 दिन भारत में रुकने का असली सच आया सामने, अमेरिकी राजदूत ने खोला बड़ा सीक्रेट!

US Ambassador Sergio Gor: भारत और अमेरिका के बीच ऐतिहासिक अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया जा रहा है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बताया कि दोनों देश मिलकर इस सदी की सबसे महत्वपूर्ण साझेदारी को आकार दे रहे हैं।

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भारत

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MI Zahir

Jun 03, 2026

US Ambassador Sergio Gor in mumbai conference

मुंबई सम्मेलन में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर। ( फोटो : ANI)

Sergio Gor: भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि भारत और अमेरिका के बीच की पार्टनरशिप इस सदी की सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक साझेदारी है। मुंबई में आयोजित 'सिटी 2026 इंडिया कॉन्फ्रेंस' में उन्होंने कहा कि दोनों देश मिल कर जो भी काम करेंगे, उससे दुनिया का भविष्य तय होगा। गोर ने पिछले महीने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की चार दिवसीय भारत यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि सेक्रेटरी रूबियो आम तौर पर इतने लंबे दौरे नहीं करते हैं, लेकिन उनका 4 दिन तक भारत में रहना इस बात का सुबूत है कि अमेरिका इस रिश्ते को कितनी गंभीरता से ले रहा है। उन्होंने यह भी साफ किया कि दोनों देश अब अपने 'नागरिक परमाणु सहयोग' को एक नए और बड़े स्तर पर ले जा रहे हैं।

टेक कंपनियों का भारत में महा-निवेश 67.5 अरब डॉलर

सरकारी बातचीत से हट कर अमेरिकी राजदूत ने एक और बड़ी बात कही। उन्होंने बताया कि अमेरिका की बड़ी प्राइवेट कंपनियां भारत में भारी निवेश कर रही हैं। उदाहरण के तौर पर:

अमेजन: एआई और डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा देने के लिए 2030 तक 35 अरब डॉलर निवेश करेगी।

माइक्रोसॉफ्ट: 17.5 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा कर चुकी है।

गूगल: भारत में 15 अरब डॉलर का एआई हब बनाने जा रही है।

चीन के एकाधिकार पर चोट और TRUST पहल

राजदूत ने बताया कि पिछले हफ्ते ही दोनों देशों ने क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) को लेकर एक अहम समझौते पर दस्तखत किए हैं। इससे दोनों देशों को एडवांस टेक्नोलॉजी और एनर्जी के लिए जरूरी चीजें आसानी से मिल सकेंगी और किसी एक देश (जैसे चीन) के एकाधिकार और बाजार की मनमानी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इसके अलावा फरवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद 'TRUST' पहल शुरू की गई थी, जिसके तहत एआई और दवाओं के कच्चे माल की सप्लाई चेन को मजबूत किया जा रहा है। अमेरिका अपनी 40% जेनेरिक दवाएं भारत से ही मंगाता है।

जल्द होगा बड़ा व्यापार समझौता

भारत और अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते को आखिरी रूप दिया जा रहा है। इसके लिए अमेरिकी सहायक व्यापार प्रतिनिधि ब्रेंडन लिंच अपनी टीम के साथ भारत आए हुए हैं। यह बातचीत फरवरी 2025 में पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा शुरू किए गए 'व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते' का हिस्सा है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के रास्ते पूरी तरह खुल जाएंगे।

चीन को सप्लाई चेन से बाहर करने के लिए सबसे बड़ा व्यावहारिक कदम

इस खबर पर वैश्विक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप सरकार के दूसरे कार्यकाल में भारत-अमेरिका के रिश्ते केवल कूटनीतिक न रह कर पूरी तरह से 'इकोनॉमिक और टेक-ड्रिवन' (आर्थिक और तकनीकी) हो गए हैं। चीन को सप्लाई चेन से बाहर करने की दिशा में यह अब तक का सबसे बड़ा व्यावहारिक कदम है।

फार्मा सेक्टर में अमेरिका की भारत पर निर्भरता बहुत ज्यादा

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि अंतरिम व्यापार समझौते पर दोनों देश कब आधिकारिक मुहर लगाते हैं और इसके तहत भारतीय और अमेरिकी बाजारों को एक-दूसरे के लिए कौन-कौन सी अतिरिक्त छूट मिलती है। इसका एक पहलू यह भी है कि फार्मा सेक्टर में अमेरिका की भारत पर निर्भरता बहुत ज्यादा है। इसमें 40% जेनेरिक दवाएं शामिल हैं। अगर भारत के एपीआई सेक्टर को अमेरिकी मदद से बढ़ावा मिलता है, तो चीन से भारत की निर्भरता भी खत्म हो जाएगी। (इनपुट: ANI)