
TVK MLA I Tahira Controversy: बिना होमवर्क के बच्चे स्कूल नहीं जाते और जोसेफ विजय की MLA विधानसभा चली गईं। फिर वही हुआ जो होना चाहिए और अक्सर होता है– फजीहत। मामला कुछ यूं है कि तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) रानीपेट विधायक आई. थाहिरा ने प्रश्नकाल के दौरान अपने निर्वाचन क्षेत्र में स्थित जेके टायर फैक्ट्री को तत्काल बंद करने की मांग कर दी। तर्क दिया कि यह फैक्ट्री प्रदूषण फैला रही है, रातभर चलती रहती है, जिससे लोगों को परेशानी हो रही है। अपने क्षेत्र की जनता के लिए एक विधायक की चिंता सराहनीय है, लेकिन उस चिंता का वाजिब होना भी जरूरी है। वाजिब तो छोड़िए विधायक साहिबा की चिंता का कोई आधार ही नहीं मिला। क्योंकि रानीपेट में जेके टायर की ऐसी कोई फैक्ट्री ही नहीं है।
आई. थाहिरा पहली बार विधायक बनी हैं। शायद उन्होंने राजनीति को बच्चों का खेल समझ लिया। बिना होमवर्क के विधानसभा पहुंची और उस फैक्ट्री पर प्रदूषण का आरोप लगा दिया जो है ही नहीं। थाहिरा ने कहा कि रानीपेट में जेके टायर फैक्ट्री पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही है और स्थानीय निवासी इसके खिलाफ प्रदर्शन करते रहे हैं, लेकिन पिछली सरकार द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने आगे कहा कि हमारी सरकार में इस कंपनी को बंद कर देना चाहिए, हमें अपने इलाके में इसकी जरूरत नहीं है।
हद तो तब हो गई जब राज्य सरकार के पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री वी. के. राजीव ने फैक्ट्री की जांच और उसके आधार पर कार्रवाई का ऐलान भी कर डाला। उद्योग मंत्री एस. कीर्तना भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार सुनिश्चित करना जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना भी आवश्यक है।
आई. थाहिरा के दावों को सुनकर विपक्ष में बैठी डीएमके का माथा ठनका। उसके नेता जांच में जुटे और सचाई खोज लाए। पूर्व उद्योग मंत्री तथा डीएमके नेता टी. आर. बी. राजा ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि जेके टायर की एक फैक्ट्री कांचीपुरम जिले के श्रीपेरंबदूर के पास है, लेकिन रानीपेट में उसकी कोई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट नहीं है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि सरकार के मंत्री एक ऐसी फैक्ट्री को लेकर की गई मांग पर जवाब क्यों दे रहे थे, जिसका अस्तित्व ही नहीं है। जगहंसाई के बाद सरकार को स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा।
उद्योग मंत्री कीर्तना ने कहा कि सत्यापन के बाद यह सामने आया कि जेके टायर की रानीपेट में कोई फैक्ट्री नहीं है। विधायक द्वारा उठाई गई पर्यावरण संबंधी चिंताओं की फिर भी जांच की जाएगी, ताकि प्रदूषण के लिए जिम्मेदार वास्तविक यूनिट की पहचान की जा सके।
वैसे ये कोई एकमात्र मामला नहीं है। पहले भी ठीक से होमवर्क न करने के मामले सामने आए हैं। मैथली ठाकुर तो बिना पर्याप्त समझ और ज्ञान के जनता के बीच वोट मांगने पहुँच गई थीं। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान अलीनगर सीट से भाजपा उम्मीदवार और गायिका मैथिली ठाकुर से जब एक पत्रकार ने अपने विकास के 'ब्लूप्रिंट' के बारे में पूछा, तो वह असमंजस में पड़ गई और इसे निजी एवं गोपनीय बताकर आगे कुछ कहने से इनकार कर दिया। उनका जवाब था - वो मैं कैमरे पर कैसे बताऊँ? ब्लूप्रिंट तो निजी चीज़ है... मैं प्लान कर रही हूं। सोशल मीडिया पर उनका ये अल्पज्ञान वायरल हुआ, सवाल उठा कि ब्लूप्रिंट कब से निजी हो गया। खैर, जनता ने उन्हें ही जिताया और विधानसभा पहुंचाया। उम्मीद है अब उन्होंने होमवर्क करना सीख लिए होगा।