
Tamizhaga Vettri Kazhagam: तमिलगा वेट्री कजकम (TVK) ने 6 अक्टूबर को होने वाले मदुरांतकम और धारापुरम विधानसभा उपचुनावों के लिए जारी अपनी स्टार प्रचारकों की सूची में बड़ा फेरबदल किया है। पार्टी ने स्टार प्रचारकों की सूची से गठबंधन दलों के कई वरिष्ठ नेताओं के नाम हटाए हैं। सीएम विजय की पार्टी ने यह कदम विपक्षी दलों द्वारा सवाल उठाए जाने के बाद उठाया है।
दरअसल, TVK की मूल सूची में VCK अध्यक्ष थोल थिरुमावलवन, MDMK महासचिव वाइको, कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर और IUML नेता के एम खादर मोहिदीन सहित गठबंधन दलों के कई नेताओं के नाम शामिल थे। अब इनमें से कई नेताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं।
दरअसल, सत्ताधारी दल द्वारा जब सहयोगी दलों के नेताओं को स्टार प्रचारक सूची में शामिल किया गया था, तब विपक्षी दलों ने यह सवाल उठाया कि क्या अन्य राजनीतिक दलों के सदस्य रहे नेताओं को TVK की स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल किया जा सकता है? DMK ने इस संबंध में चुनाव आयोग से संपर्क कर मूल सूची को रद्द करने की मांग की। DMK के संगठन सचिव आर एस भारती ने तर्क दिया कि अन्य दलों के नेताओं को शामिल करना जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 77 के विपरीत है, साथ ही उन्होंने चुनावी खर्च से जुड़े मुद्दे भी उठाए।
उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 77 उम्मीदवारों द्वारा रखे जाने वाले चुनावी खर्च के हिसाब-किताब से संबंधित है। इसमें मान्यता-प्राप्त स्टार प्रचारकों से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, उम्मीदवारों को इस धारा के तहत चुनावी खर्च का अलग और सही ब्योरा रखना अनिवार्य होता है। आयोग के निर्देशों में यह भी स्पष्ट प्रावधान है कि जब किसी अन्य दल या गठबंधन दल का स्टार प्रचारक किसी उम्मीदवार के साथ किसी रैली में हिस्सा लेता है, तो ऐसी स्थिति में प्रचारक के संबंधित निर्वाचन क्षेत्र तक यात्रा खर्च सहित कुछ खर्चों को उम्मीदवार के चुनावी खर्च खाते में शामिल किया जा सकता है।
हालांकि, अभी तक चुनाव आयोग की ओर से ऐसा कोई निर्णय सामने नहीं आया है, जिसमें TVK की मूल सूची को अवैध घोषित किया गया हो। इसलिए नामों को हटाए जाने को विपक्ष की आपत्तियों के बाद हुए एक घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। DMK के लिए यह मुद्दा TVK की चुनावी व्यवस्था की जांच करने और चुनाव आयोग के सामने सवाल उठाने का एक अवसर बनकर सामने आया है। वहीं TVK के लिए फिलहाल सबसे अहम मुद्दा संशोधित प्रचार व्यवस्था और उन गठबंधन नेताओं से जुड़ा उपचार है जो उपचुनाव प्रचार में हिस्सा ले सकते हैं।