केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 90वीं इंटरपोल महासभा के समापन सत्र को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने अनुभवों और उपलब्धियों के आधार पर इंटरपोल को अगले 50 साल के योजना तैयार करने के लिए कहा।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को दिल्ली के प्रगति मैदान में वैश्विक पुलिस निकाय इंटरपोल की 90वीं महासभा के समापन सत्र को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने 164 देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय अपराधों से लड़ने के तरीकों पर व्यापक चर्चा की। गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि आज के युग के अपराधों और अपराधियों को रोकना है तो हमें कन्वेंशनल जियो-ग्राफिक बॉर्डर से ऊपर उठकर सोचना होगा। हमें सभी देशों को ‘टेररिज्म’ और ‘टेररिस्ट’ की व्याख्या पर सहमति बनानी होगी।
अमित शाह ने कहा कि "इंटरपोल ने 100 साल की यात्रा में अपनी योग्यता साबित की है। भारत इंटरपोल के सबसे पुराने सदस्यों में से एक है और अंतरराष्ट्रीय सहयोग व बहुपक्षवाद के लिए अपनी भूमिका को मान्यता देता है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की ओर से मैं सुरक्षा, विश्व शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए इंटरपोल के प्रयास की सराहना करता हूं।"
8 सालों में पुलिस बल को भारत सरकार को किया मजबूत
अमित शाह ने कहा कि "पिछले आठ सालों में भारत सरकार ने पुलिस बलों को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय ने सरकार द्वारा की गई अन्य पहलों के बीच ई-कोर्ट, ई-फोरेंसिक जैसे आपराधिक न्याय देने के लिए तंत्र में सुधार किया है।
साइबर क्राइम पर नजर रखने के लिए स्थापित किया गया भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र
गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि बढ़ते साइबर क्राइम पर नजर रखने के लिए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र भी स्थापित किया गया है। डेटा और सूचना क्रांति ने अपराधों को सीमाहीन बना दिया है। उन्नत तकनीकों के आधार पर काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट से लड़ने के लिए अन्य देशों को भी उनसे लड़ने के लिए एक साथ आने की जरूरत है।
इंटरपोल 50 साल के लिए तैयार करें योजना
अमित शाह ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद से लड़ने के लिए सीमा सहयोग सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। सभी देशों की आतंकवाद रोधी एजेंसियों के पास एक वास्तविक समय सूचना शेयरिंग का तंत्र होना चाहिए। नार्को-आतंक भी बढ़ती हुई चुनौती है जिससे लड़ने के लिए सभी देशों को एकसाथ सहयोग करना चाहिए। वहीं इंटरपोल को अपने 100 साल के अनुभवों को यूज करते हुए अगले 50 सालों के लिए सभी प्रकार के अंतरराष्ट्रीय अपराधों से निपटने के लिए एक योजना तैयार करना चाहिए।
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