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उरी सर्जिकल स्ट्राइक के 10 साल: वो सैन्य आपरेशन जिसने ख़त्म कर दी पाकिस्तान की परमाणु ब्लैकमेलिंग

उरी सर्जिकल स्ट्राइक के 10 साल, पैरा एसएफ के 19 जवानों ने 58 मिनट में आतंकियों को ढेर कर पाकिस्तान की परमाणु ब्लैकमेलिंग खत्म की। जानें पूरी कहानी।
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Sep 29, 2026
Indian Army News
भारतीय सेना के जवान अलर्ट। (फोटो- IANS)

Uri Surgical Strike: उरी सर्जिकल स्ट्राइक-ऐसी सैन्य कार्रवाई जिसने भारतीय रक्षा रणनीति की धुरी को पूरी तरह से बदल दिया। 28-29 सितंबर की दरम्यानी रात एलीट पैरा एसएफ़ के 19 जवानों ने नियंत्रण रेखा को पार किया। 58 मिनट में ही आतंकियों को चुन चुनकर दफन कर दिया। इसके बाद एलान कर दिया -"ये नया भारत है, घर में घुसकर मारता है"। भारत ने इस सैन्य कार्रवाई को खुलेआम स्वीकार भी किया। गौरतलब है कि सेना के उरी कैंप पर 18 सितंबर को हुए आतंकी हमले में 19 जवान शहीद हो गए थे।

उरी स्ट्राइक से जुड़े रहे एक सैन्य अफसर के अनुसार कार्रवाई में शामिल सभी 19 जवान सुबह साढ़े चार बजे भारतीय क्षेत्र में सुरक्षित वापस पहुंच गए थे। वापसी में लंबा रास्ता लिया था, लेकिन इसमें 60 मीटर का गैप ऐसा था, जिसे हमनें पेट के बल रेंगकर पार किया था। 20 मार्च, 2017 को सर्जिकल स्ट्राइक करने वाले पांच सदस्यों को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। इसके बाद यह तय हो गया कि आतंकियों को मारने के लिए अब हद या फिर सरहद नहीं देखी जाएगी।

आतंक पर कसी नकेल

कर्नल मनीष ओझा (सेवानिवृत्त) कहते हैं कि इस सैन्य कार्रवाई से भारत ने दुनिया को स्पष्ट कर दिया कि अब भारत में हुई आतंकी घटनाओं का जवाब पाकिस्तान को उसकी सरजमीं पर मिलेगा। उरी के बाद, बालाकोट और फिर आपरेशन सिंदूर तीनों ही कार्रवाई पाकिस्तानी की जमीन पर ही लड़ी गई। इस जवाबी नीति ने ही भारत में पाकिस्तान की बेलगाम आतंकवादी घटनाओं पर नकेल कसने का काम किया है।

ख़त्म हुआ परमाणु ब्लैकमेलिंग का खेल

उरी सर्जिकल स्ट्राइक एक ऐसी स्ट्राइक थी जिसने पाकिस्तान के परमाणु ब्लैकमेल के खेल को पूरी तरह से ख़त्म कर दिया। लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ(सेवानिवृत्त) बताते हैं कि उरी हमले के बाद रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर श्रीनगर पहुंचे और उस दौरान उन्होंने पूछा, हम क्या करेंगे? मेरा जवाब था हम भी पार जाएंगे और आतंकियों को मारकर आएंगे। बातचीत के बाद वहीं पर तुरंत इसकी अनुमति भी मिल गई।

सर्जिकल स्ट्राइक के दो हीरो

ले.जनरल दुआ बताते हैं कि मैं इस बात का गवाह हूं कि सर्जिकल स्ट्राइक की अनुमति के लिए उन्होंने किसी से भी नहीं पूछा। सेनाध्यक्ष भी मौके पर ही मौजूद थे, तो ऐसे में हर संशय भी खत्म था। हमने नियंत्रण रेखा को पार करके बिना किसी नुकसान के आतंकियों को वहां भेज दिया जहां वह जाना चाहते हैं। इस सर्जिकल स्ट्राइक के दो हीरो हैं, एक जिन्होंने यह कार्रवाई की और दूसरे तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर।

Updated on:
29 Sept 2026 06:57 am
Published on:
29 Sept 2026 06:57 am