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SFJ Jail Recruitment: जेल से खालिस्तानी नेटवर्क में भर्ती, हाईवे पर मिले 1.5 लाख रुपये, प्रीतपाल सिंह के जरिए हुआ बड़ा खुलासा

Khalistani Network: खुफिया एजेंसियों की जांच में जेल से खालिस्तानी नेटवर्क में भर्ती का खुलासा हुआ है। प्रीतपाल सिंह को जेल में पन्नू का नंबर मिला और हाईवे पर 1.5 लाख रुपये पहुंचाए गए।
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भारत

•

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Rahul Yadav

•

Sep 29, 2026

SFJ Jail Recruitment Dead Drop Pannun Preetpal Singh

खुफिया एजेंसियों की जांच में जेल से खालिस्तानी नेटवर्क में भर्ती का खुलासा हुआ है। (सांकेतिक तस्वीर - एआई जनरेटेड)

SFJ Jail Recruitment Dead Drop Pannun Preetpal Singh: खुफिया एजेंसियों ने उत्तर भारत की जेलों में खालिस्तान समर्थक संगठनों की ओर से कथित भर्ती नेटवर्क को लेकर जांच तेज कर दी है। एजेंसियों को हाल में हिरासत में लिए गए एक आरोपी से पूछताछ के दौरान जेल के अंदर भर्ती किए जाने की जानकारी मिली है। इसी जांच में प्रीतपाल सिंह का नाम सामने आया है। बताया गया है कि जेल में रहने के दौरान उसे गुरपतवंत सिंह पन्नू से संपर्क के लिए एक फोन नंबर दिया गया था।

जेल में तैयार हो रहा था नेटवर्क

जांच एजेंसियों के मुताबिक, खालिस्तान समर्थक संगठन जेल में बंद ऐसे कैदियों को निशाना बना रहे हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। इनमें पहली बार अपराध करने वाले या छोटे मामलों में जेल पहुंचे लोग भी शामिल हैं। एजेंसियों का मानना है कि ऐसे लोगों को प्रभावित कर बाद में अलग-अलग कामों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

एजेंसियां जेलों के भीतर संपर्क बनाने और बाहर आने के बाद इन लोगों की गतिविधियों की भी जांच कर रही हैं। इस पूरे नेटवर्क के डिजिटल संपर्क और पैसों के लेनदेन की जानकारी जुटाई जा रही है।

प्रीतपाल सिंह को जेल में मिला था पन्नू का नंबर

जांच में सामने आया है कि प्रीतपाल सिंह का पहले भी खालिस्तान समर्थक गतिविधियों से जुड़ा इतिहास रहा है। उसे 2023 में इसी तरह के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था।जेल में रहने के दौरान उसे गुरपतवंत सिंह पन्नू से संपर्क करने के लिए एक फोन नंबर दिया गया। 2026 में जेल से बाहर आने के बाद प्रीतपाल ने पन्नू से सीधे संपर्क किया।इसके बाद उसे आगे के काम के लिए पैसे भी मिले।

हाईवे पर डेड-ड्रॉप से मिले 1.5 लाख रुपये

एजेंसियों के मुताबिक, प्रीतपाल सिंह को फरीदकोट-अमृतसर हाईवे पर एक तय जगह से 1.5 लाख रुपये मिले। इसे डेड-ड्रॉप के जरिए पहुंचाया गया था। डेड-ड्रॉप में पैसे, हथियार या दूसरी सामग्री सीधे किसी व्यक्ति को देने के बजाय पहले से तय जगह पर रखी जाती है। इसके बाद संबंधित व्यक्ति को उस जगह और सामान की जानकारी सुरक्षित माध्यम से दी जाती है। जांच एजेंसियों का कहना है कि पाकिस्तान से जुड़े मॉड्यूल भी इस तरीके का इस्तेमाल कर रहे हैं। हथियार, गोला-बारूद और नकदी ड्रोन या दूसरे गुप्त तरीकों से सीमा पार भेजे जाने के बाद तय स्थानों पर छिपाए जाते हैं।

दिल्ली-पंजाब में लिखे खालिस्तान समर्थक नारे

जांच के मुताबिक, प्रीतपाल सिंह और उसके साथियों ने दिल्ली और पंजाब में ब्रिक्स विरोधी और खालिस्तान समर्थक नारे लिखे थे। इन गतिविधियों का वीडियो बनाया गया और उसे पन्नू को भेजा गया। एजेंसियों ने हाल ही में पन्नू से जुड़े एक मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। इसी कार्रवाई में प्रीतपाल सिंह को गिरफ्तार किया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि जेल से बाहर आने के बाद प्रीतपाल ने एक अन्य कैदी को अपने साथ जोड़ा था। वह व्यक्ति भी जमानत पर बाहर था। इसके बाद उसे दिल्ली में किए जाने वाले काम के लिए इस्तेमाल किया गया।

2016 की नाभा जेलब्रेक से जुड़ता है मामला

जेल के जरिए आपराधिक नेटवर्क में लोगों की भर्ती का मामला नया नहीं है। वर्ष 2016 में पंजाब की नाभा जेल से खालिस्तान समर्थक आतंकियों और उनके सहयोगियों के फरार होने की घटना ने जेल और आतंकी नेटवर्क के बीच संबंधों पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।अब एजेंसियां इसी तरह के नेटवर्क के नए तरीकों की जांच कर रही हैं। इनमें जेल के अंदर संपर्क बनाना, बाहर आने के बाद लोगों को काम देना और पैसे या हथियार पहुंचाने के लिए तय जगहों का इस्तेमाल करना शामिल है।

फिलहाल एजेंसियां प्रीतपाल सिंह से जुड़े डिजिटल संपर्क, पैसों के लेनदेन और जेल के भीतर बने संपर्कों की जानकारी जुटा रही हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं और उन्हें किस तरह की जिम्मेदारियां दी गई थीं।