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अमेरिकी विद्वान का दावा, RSS को अलग-थलग करने की कोशिश अमेरिका के हितों को नुकसान पहुंचा सकती है

US-India Relations: अमेरिकी विदेश नीति विशेषज्ञ बिल ड्रेक्सेल ने कहा है कि RSS को अमेरिका और पश्चिमी देशों में अलग-थलग करने की कोशिश संगठन से ज्यादा अमेरिकी हितों और भारत-अमेरिका संबंधों को नुकसान पहुंचा सकती है।
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Updated: 8 Sep 2026, 10:25 PM IST
Mohan Bhagwat in New York.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत। (Photo- ANI)

RSS Controversy: अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन में कुछ राजनीतिक नेताओं और संगठनों द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को अलग-थलग करने की कोशिश अमेरिका के हितों को नुकसान पहुंचा सकती है। यह कहना है एक अमेरिकी विदेश नीति के विशेषज्ञ बिल ड्रेक्सेल का। उन्होंने कहा कि RSS से दूरी बनाने की ऐसी मुहिम भारत और अमेरिका के रिश्तों को मजबूत करने की कोशिशों को भी कमजोर कर सकती है।

वॉल स्ट्रीट जर्नल में लिखा लेख

हडसन इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो बिल ड्रेक्सेल ने वॉल स्ट्रीट जर्नल में प्रकाशित एक ओपिनियन लेख में यह बात कही। उनका यह लेख RSS प्रमुख मोहन भागवत के 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में करीब 5,000 लोगों को संबोधित करने के बाद प्रकाशित हुआ।

लेख के अनुसार, अमेरिकी आयोग USCIRF ने मोहन भागवत का वीजा रद्द करने की मांग की। इसके बाद टोरंटो में उनके कार्यक्रम से पहले करीब 270 संगठनों ने कनाडा सरकार से उन्हें रोकने और RSS को आतंकवादी संगठन घोषित करने पर विचार करने की अपील की। लंदन में भी कुछ समूहों ने मेयर सादिक खान से भागवत को शहर के नियंत्रण वाले किसी स्थान पर कार्यक्रम की अनुमति न देने की मांग की।

इतनी बड़ी संस्था पर असर मुश्किल

ड्रेक्सेल ने कहा कि RSS को अलग-थलग करने की कोशिशों से संगठन कमजोर होने की संभावना कम है। लेख के मुताबिक, भारत में RSS की करीब 83,000 नियमित शाखाएं लगती हैं और इसके अनुमानित 50 लाख सदस्य हैं, जिनमें लगभग सभी बिना वेतन के स्वयंसेवक हैं।

अमेरिका को RSS से संवाद करना चाहिए

ड्रेक्सेल ने RSS को एक विशाल और लगातार बदलता संगठन बताया। उन्होंने कहा कि संगठन से सहमत होना जरूरी नहीं है, लेकिन अमेरिका के लिए उससे संवाद करना और उसे समझना महत्वपूर्ण है। उन्होंने भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत और हिंद-प्रशांत व पश्चिम एशिया में उसकी रणनीतिक अहमियत का भी जिक्र किया।

कार्यक्रम को लेकर हुआ विरोध

न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने कार्यक्रम रद्द करने की मांगों पर प्रतिक्रिया देते हुए RSS की हिंदू राष्ट्रवादी सोच का बहिष्कार किया था। उन्होंने इसके बढ़ते प्रभाव को भी चिंताजनक कहा, हालांकि यह भी माना कि निजी कार्यक्रम पर शहर प्रशासन का अधिकार नहीं है।

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8 Sep 2026, 10:25 PM IST
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