
BJP Congress Vande Mataram Controversy: ‘वंदे मातरम्’ को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच छिड़ी सियासी बहस अब तृणमूल कांग्रेस तक पहुंच गई है। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन की कांग्रेस पर की गई टिप्पणी के बाद टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने ऐसा जवाब दिया है, जिसने विवाद को और हवा दे दी। आजाद ने नबीन को सीधे सामने आने की चुनौती देते हुए कहा कि अगर बात पूरे गीत की है तो वह भी कागज देखकर पूरा ‘वंदे मातरम्’ सुनाने के लिए तैयार हैं।
टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें सीधे चुनौती दी। उन्होंने कहा कि नबीन उनके सामने आएं और पूरा ‘वंदे मातरम्’ सुनाएं। आजाद ने साफ कहा कि उन्हें पूरा गीत याद नहीं है, लेकिन वह कागज देखकर इसे शुरू से अंत तक पढ़ने के लिए तैयार हैं।
आजाद का यह बयान ऐसे समय आया है जब राष्ट्रीय गीत को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव पहले ही तेज हो चुका है।
कीर्ति आजाद ने चुनौती भरे अंदाज में कहा कि वह अभी तैयार हैं। उनका कहना था कि यदि नितिन नबीन पूरे ‘वंदे मातरम्’ को लेकर सवाल उठा रहे हैं तो उन्हें भी सामने आकर उसका पूरा संस्करण सुनाना चाहिए।
इस बयान का सियासी संदेश साफ है आजाद ने बहस को कांग्रेस की कथित स्थिति से हटाकर सीधे बीजेपी अध्यक्ष की व्यक्तिगत परीक्षा के सवाल में बदल दिया है।
बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने हाल के दिनों में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस राष्ट्रीय गीत के प्रति सम्मान नहीं दिखा रही और इसे अपनी राजनीति से जोड़ रही है। नबीन ने कांग्रेस पर ‘तुष्टीकरण की राजनीति’ के आरोप भी लगाए।
बीजेपी की ओर से यह विवाद उस घटनाक्रम के बाद और तेज हुआ, जिसमें कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर सवाल उठे। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि गीत को बीच में रोकने की कोशिश हुई।
हालांकि कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज किया। पार्टी की ओर से सफाई दी गई कि सोनिया गांधी का इशारा गीत रोकने के लिए नहीं, बल्कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी की व्यवस्था करने को लेकर था।
‘वंदे मातरम्’ की मौजूदा राजनीतिक अहमियत को इस तथ्य से भी समझा जा सकता है कि 2026 में इसके 150 वर्ष पूरे होने का संदर्भ लगातार सामने आया है। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने भी अपने शुरुआती राष्ट्रीय अध्यक्षीय संबोधन में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का उल्लेख किया था।
ऐसे में इस साल राष्ट्रीय गीत का मुद्दा राजनीतिक रूप से और ज्यादा संवेदनशील हो गया है। बीजेपी इसे राष्ट्रीय गौरव और देशभक्ति के प्रतीक के रूप में जोर-शोर से उठा रही है, जबकि विपक्ष इस मुद्दे पर बीजेपी के राजनीतिक हमलों का जवाब दे रहा है।
कीर्ति आजाद के बयान ने विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है। अब सवाल यह है कि बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन इस चुनौती का क्या जवाब देते हैं। क्या बहस फिर कांग्रेस की भूमिका पर लौटेगी या ‘पूरा वंदे मातरम् कौन सुना सकता है’ वाला सवाल ही राजनीतिक बयानबाजी का नया केंद्र बनेगा?
फिलहाल इतना तय है कि ‘वंदे मातरम्’ पर शुरू हुई सियासी बहस थमती नजर नहीं आ रही। कीर्ति आजाद के ताजा बयान ने इसमें एक नया अध्याय जरूर जोड़ दिया है।