Global Oil Market 2026:$1.5 ट्रिलियन के वैश्विक तेल बाजार में वेनेजुएला 303 बिलियन बैरल के साथ दुनिया का नंबर-1 देश बन गया है। जानिए कैसे भारत अपनी रिफाइनिंग शक्ति से अरबों डॉलर कमा रहा है।
Crude Oil Diplomacy: दुनिया के नक्शे पर वेनेजुएला एक ऐसा देश है जो बेशुमार प्राकृतिक दौलत पर बैठा है। हालिया घटनाक्रम और अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार, यह देश तेल भंडार के मामले में दुनिया का बेताज बादशाह (Venezuela Oil Treasure 2026) है। आइए, सरल भाषा में समझते हैं कि दुनिया के तेल बाज़ार का गणित क्या है और वेनेजुएला इस रेस में कहाँ खड़ा है। दरअसल 303 बिलियन बैरल के विशाल तेल भंडार के साथ वेनेजुएला (Global Crude Oil Economy)दुनिया के 'ब्लैक गोल्ड' का निर्विवाद राजा बना हुआ है। वहीं, भारत अपनी रिफाइनिंग क्षमता के दम पर कच्चे तेल
(Crude Oil Diplomacy) को अरबों डॉलर की कमाई में बदल कर एक नया इतिहास रच रहा है।
ताजा अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों (2025-26) के अनुसार, वेनेजुएला के पास 303.8 बिलियन बैरल का प्रमाणित तेल भंडार है। यह मात्रा सऊदी अरब (267 बिलियन बैरल) से भी कहीं अधिक है।
भंडार बनाम उत्पादन: इतनी दौलत के बावजूद वेनेजुएला का दैनिक उत्पादन केवल 9.5 लाख बैरल के करीब है, जबकि अमेरिका 138 लाख बैरल प्रतिदिन निकालकर उत्पादन में टॉप पर है।
हैवी क्रूड की समस्या: वेनेजुएला का अधिकांश तेल 'हैवी क्रूड' है, जिसे रिफाइन करना तकनीकी रूप से जटिल और महंगा होता है।
प्रतिबंधों का असर: लंबे समय से लगे अमेरिकी प्रतिबंधों ने इसके बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया, जिससे इसका वार्षिक निर्यात राजस्व फिलहाल $17.5 बिलियन के आसपास ही सिमटा रहा।
तेल निर्यात के जरिए अरबों डॉलर का राजस्व जुटाने वाले देशों में रूस और खाड़ी देशों का बोलबाला है।
सऊदी अरब: अपनी बादशाहत बरकरार रखते हुए सालाना $180 बिलियन (लगभग 15 लाख करोड़ रुपये) से ज्यादा का निर्यात राजस्व अर्जित कर रहा है।
रूस: कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बाद भी रूस ने नवंबर 2025 में अकेले $11 बिलियन (92,000 करोड़ रुपये) का तेल बेचा।
कजाकिस्तान और ईरान: कजाकिस्तान ने एक साल में $64.18 बिलियन का तेल निर्यात किया, वहीं ईरान ने अकेले चीन को $32.50 बिलियन का तेल बेचकर अपनी अर्थव्यवस्था को सहारा दिया।
भारत ने दुनिया को दिखाया है कि कैसे तेल आयात को अवसर में बदला जाता है। भारत ने वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान $149.57 बिलियन (करीब 12.5 लाख करोड़ रुपये) का कच्चा तेल आयात किया।
रणनीतिक बदलाव: भारत ने अपनी निर्भरता किसी एक देश पर न रखकर रूस से आयात घटाकर 32% किया और UAE जैसे देशों से साझेदारी बढ़ाई है।
UAE से बढ़ता व्यापार: संयुक्त अरब अमीरात से भारत का तेल आयात 8.7% बढ़कर $12.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
एक्सपोर्ट का नया रिकॉर्ड: भारतीय रिफाइनरियों (रिलायंस और नायरा) ने रूसी तेल को रिफाइन कर अमेरिका को ही 25,000 करोड़ रुपये का ईंधन बेचकर शानदार मुनाफा कमाया है।
बकाया वसूली की उम्मीद: वेनेजुएला में बदले राजनीतिक हालातों के बीच भारतीय कंपनी ONGC को वहां फंसा अपना $1 अरब (8,300 करोड़ रुपये) का बकाया मिलने की प्रबल संभावना जगी है।
वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा भंडार तो है, लेकिन इसका अधिकांश हिस्सा 'हैवी क्रूड ऑयल' (भारी कच्चा तेल) है। इसे ज़मीन से निकालना और रिफाइन करना न केवल कठिन है, बल्कि बहुत महंगा भी है। इसके अलावा, अमेरिकी प्रतिबंधों और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण वेनेजुएला अपनी क्षमता के अनुसार निर्यात नहीं कर पाया है। हालांकि, 2025 में कुछ प्रतिबंधों में ढील और चीन के साथ व्यापार बढ़ने से इसके निर्यात में सुधार देखा गया है।
बहरहाल,वेनेजुएला का 'अभेद्य किला' ढहने और तेल क्षेत्रों पर वैश्विक नियंत्रण की नई कोशिशों से आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ी हलचल हो सकती है। अगर वेनेजुएला का तेल बाजार में पूरी क्षमता से आता है, तो वैश्विक सप्लाई बढ़ने से आम आदमी को राहत मिल सकती है।
(इनपुट: U.S. Energy Information Administration EIA ,Jefferies, Kpler, OilX)