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वोटर लिस्ट में एक भी विदेशी न हो, यह हमारा संवैधानिक कर्तव्य.. सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग की दो-टूक दलील

सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) उसका संवैधानिक अधिकार है। आयोग ने तर्क दिया कि वोटर लिस्ट को विदेशी नागरिकों से मुक्त रखना पारदर्शी लोकतंत्र के लिए अनिवार्य है। जानें कैसे यह प्रक्रिया NRC से अलग है, साथ ही अनुच्छेद 324, 325 और 326 के तहत EC को क्या शक्तियां प्राप्त हैं।

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Jan 07, 2026
Supreme Court and Election commission of india (AI Generated Image)

Foreigners in Voter List: केंद्रीय चुनाव आयोग (EC) ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में कहा कि उसे मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) करने का अधिकार और संवैधानिक शक्ति प्राप्त है। यह सुनिश्चित करना उसका कर्तव्य है कि मतदाता सूचियों में किसी भी विदेशी का नाम शामिल न हो। देश के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच के समक्ष SIR की चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई की शुरुआत में EC की ओर से वरिष्ठ अधिकवक्ता राकेश द्विवेदी ने ये तर्क दिया।

इन याचिकाओं में चुनाव आयोग की शक्तियों के दायरे, नागरिकता और मतदान के अधिकार पर संवैधानिक प्रश्न उठाए गए हैं। द्विवेदी ने तर्क दिया कि हमारा संविधान मुख्य रूप से नागरिक-केंद्रित है। मतदाता सूची में किसी भी विदेशी का नाम न होना सुनिश्चित करना आयोग का संवैधानिक कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324, 325 और 326, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 16 के साथ मिलकर, चुनाव आयोग को मतदाता सूचियों में संशोधन करने के अपने अधिकार का प्रयोग करने से नहीं रोकते हैं। द्विवेदी गुरुवार को भी दलीलें जारी रखेंगे।

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NRC से अलग है SIR

द्विवेदी ने यह भी तर्क दिया कि SIR की प्रक्रिया राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) दोनों के उद्देश्य मौलिक रूप से भिन्न हैं। एनआरसी में सभी व्यक्ति शामिल होते हैं, जबकि मतदाता सूची में केवल 18 वर्ष से अधिक आयु के नागरिक ही शामिल होते हैं। मानसिक अस्वस्थ, दिवालिया आदि विभिन्न कारणों से अन्य अयोग्य व्यक्तियों को भी मतदाता सूची से बाहर रखा जाता है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग राजनीतिक निर्णय नहीं ले रहा है, बल्कि अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वहन कर रहा है।

निर्वाचन आयोग की संवैधानिक शक्तियां

आपको बता दें कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324, 325 और 326 मिलकर निर्वाचन आयोग की संवैधानिक भूमिका को परिभाषित करते हैं।

अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को लोकसभा, राज्य विधानसभाओं तथा राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति के चुनावों के संचालन, निर्देशन और नियंत्रण की व्यापक शक्तियाँ प्राप्त हैं।

अनुच्छेद 325 मतदाता सूची में धर्म, जाति, लिंग या भाषा के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव को निषिद्ध करता है, जिसे लागू कराने की जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग निभाता है।

अनुच्छेद 326 वयस्क मताधिकार के सिद्धांत को स्थापित करता है, जिसके तहत 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी पात्र नागरिकों को मतदान का अधिकार सुनिश्चित किया जाता है।

Updated on:
07 Jan 2026 02:36 am
Published on:
07 Jan 2026 02:32 am
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