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Political Battle: बंगाल में शाह का वार, ममता का पलटवार, क्या 2026 में टूटेगा TMC का किला ?

West Bengal Assembly Elections 2026: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 के लिए अमित शाह और ममता बनर्जी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। जानिए क्या हैं मुख्य मुद्दे।

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Mar 28, 2026
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी । ( फोटो: ANI)

West Bengal Assembly Elections 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति इस समय ज्वालामुखी के मुहाने पर खड़ी है। 2026 के विधानसभा चुनावों (West Bengal Assembly Elections 2026) के शंखनाद के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के बीच आर-पार की जंग छिड़ गई है। आज कोलकाता की धरती से शाह ने जहां भ्रष्टाचार और सुरक्षा पर 32 पन्नों का आरोप पत्र (Charge Sheet) जारी किया, वहीं टीएमसी (TMC) ने इसे बंगाल की अस्मिता और महिलाओं का अपमान बताते हुए जोरदार पलटवार किया है। सियासत का यह पारा अब थमने वाला नहीं है।

अमित शाह का 'अभियोगनामा' और टीएमसी का प्रहार (Political War)

कोलकाता में आयोजित विशाल जनसभा में अमित शाह ने ममता सरकार पर तीखे बाण छोड़े। उन्होंने कहा कि बंगाल अब घुसपैठियों का सुरक्षित ठिकाना बन चुका है। शाह ने 'कट-मनी' और सिंडिकेट राज को राज्य की बर्बादी का मुख्य कारण बताया। उनका सबसे बड़ा हमला महिला सुरक्षा को लेकर था, जिस पर उन्होंने कहा कि बंगाल की बेटियां अब सुरक्षित नहीं हैं। शाह ने 2026 में 'परिवर्तन' का नारा देते हुए कहा कि इस बार जनता टीएमसी को 'बाय-बाय' कह देगी।

"बीजेपी को महिलाओं से नफरत": टीएमसी की हुंकार (Women Empowerment)

अमित शाह के आरोपों पर पलटवार करने में टीएमसी ने जरा भी देरी नहीं की। ममता बनर्जी ने सीधे तौर पर बीजेपी को 'महिला विरोधी' करार दिया। टीएमसी का तर्क है कि 'लक्ष्मी भंडार' जैसी योजनाओं से बंगाल की महिलाएं आत्मनिर्भर हुई हैं, जो बीजेपी को पच नहीं रहा है। अभिषेक बनर्जी ने यूपी और एमपी के अपराध आंकड़ों का हवाला देते हुए बीजेपी को घेरा और कहा कि जो लोग बंगाल का फंड रोककर बैठे हैं, उन्हें सुरक्षा पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

भवानीपुर में महामुकाबला और चुनावी समीकरण (Battleground Bengal)

बंगाल की चुनावी बिसात पर सबसे चर्चित मुकाबला भवानीपुर सीट पर होने जा रहा है। यहां एक तरफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हैं, तो दूसरी तरफ बीजेपी ने अपने कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी को मैदान में उतारा है। यह सीट इस चुनाव का केंद्र बिंदु बन गई है। संदेशखाली की घटनाएं और क्षेत्रीय अस्मिता के मुद्दे इस बार के चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाने वाले हैं। बंगाल की जनता अब 'दीदी' के कल्याणकारी कार्यों और 'दादा' के परिवर्तन के वादों के बीच खड़ी है।

विकास से ज्यादा 'अस्मिता' और 'सुरक्षा' के मुद्दे हावी रहेंगे

इस राजनीतिक टकराव से स्पष्ट है कि बंगाल में अब विकास से ज्यादा 'अस्मिता' और 'सुरक्षा' के मुद्दे हावी रहेंगे। जनता के बीच ध्रुवीकरण और तीखा होने की संभावना है। अगले कुछ दिनों में टीएमसी राज्यव्यापी रैलियों के माध्यम से केंद्र सरकार की ओर से रोके गए फंड के मुद्दे को घर-घर ले जाएगी, जबकि बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व के और बड़े दौरों की तैयारी कर रही है। चुनाव के बीच बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और 'बाहरी बनाम भीतरी' की बहस एक बार फिर सोशल मीडिया पर युद्ध का मैदान बन गई है।

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