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Bengal Elections2026: बंगाली अस्मिता और SIR बना प्रमुख मुद्दा, TMC- BJP में चल रही जुबानी जंग

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी गलियारे की सरगर्मियां तेज हैं। बंगाल चुनाव में TMC और BJP के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इस चुनाव में TMC ने SIR प्रक्रिया को प्रमुख मुद्दा बनाकर उठाया है।

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Apr 13, 2026
ममता बनर्जी और अमित शाह (File Photo)

Assembly Elections2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 महज सत्ता का संघर्ष नहीं, बल्कि राज्य की सामाजिक और राजनीतिक दिशा तय करने वाला निर्णायक मोड़ बन गया है। 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान और 4 मई को परिणाम इस बहुस्तरीय मुकाबले की तस्वीर साफ करेंगे। पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर बहुमत के लिए 148 का आंकड़ा जरूरी है। तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर ने चुनाव को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया है।

TMC और BJP में चल रही जुबानी जंग

ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए भावनात्मक अपील के साथ उम्मीदवारी दाखिल की है। TMC, BJP पर जनसंख्या संतुलन बिगाड़ने और प्रशासनिक हस्तक्षेप के आरोप लगा रही है। इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस बंगाली अस्मिता के मुद्दे को प्रमुख बनाकर चुनावी रणनीति को धार दे रही है। दूसरी तरफ BJP की तरफ से शीर्ष नेताओं में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह लगातार रैलियां कर रहे हैं। BJP ने TMC पर अंतरराष्ट्रीय छवि खराब करने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही BJP ने चुनावी घोषणापत्र में कल्याणकारी योजनाएं, सुरक्षा, शासन सुधार, घुसपैठ और भ्रष्टाचार को प्रमुख मुद्दा बनाया है।

TMC-BJP के बाद कांग्रेस और वाम मोर्चा की चुनावी हुंकार

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए TMC और BJP के बीच कड़ी जुबानी जंग चल रही है। इसके अलावा बंगाल में कांग्रेस और वाम दल सीमित प्रभाव के साथ मैदान में हैं। कांग्रेस ने अपनी दूसरी सूची में 7 उम्मीदवार बदले हैं। वहीं, वाम दल कुछ क्षेत्रों तक सीमित सक्रियता दिखा रहे हैं, जिससे उनके व्यापक असर की संभावना फिलहाल कम नजर आ रही है।

बंगाल चुनाव में प्रमुख मुद्दे

बंगाल चुनाव में SIR प्रक्रिया बड़ा चुनावी मुद्दा बनकर सामने आया है। खासतौर पर TMC इसे प्रमुखता से उठा रही है। मतदाता सूची से लगभग 27 लाख नाम हटाए जाने पर विवाद गहराया है, जिस पर तृणमूल कांग्रेस ने अदालत जाने की घोषणा की है। चुनाव आयोग ने हिंसा, बूथ कैप्चरिंग और डराने-धमकाने पर सख्ती के संकेत दिए हैं। इसके अलावा महिलाओं की सुरक्षा, भ्रष्टाचार, घुसपैठ और रोजगार चुनावी चर्चा के केंद्र में हैं। बीजेपी इन मुद्दों पर सरकार को घेर रही है, जबकि तृणमूल अपने विकास कार्यों और सामाजिक योजनाओं को प्रमुखता से पेश कर रही है।

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