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Sunday हो या Monday, रोज खाओ अंडे… BJP शासित राज्यों के मिड-डे मील से क्यों गायब हो रहे हैं अंडे?

West Bengal Iskcon Mid day Meal: मिड-डे मील से अंडे हटाने को लेकर देशभर में बहस तेज है। पश्चिम बंगाल से लेकर महाराष्ट्र तक कई राज्यों में क्या बदला और बच्चों के पोषण पर इसका क्या असर पड़ेगा।
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Jun 26, 2026
West Bengal Egg Controvesry
पश्चिम बंगाल में अंडे को लेकर विवाद (AI Image)

Egg in Mid day Meal: संडे हो या मंडे, रोज खाओ अंडे' नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमेटी (NECC) का यह मशहूर जिंगल आज भी लोगों की जुबान पर है। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को अंडे के पोषण और उसके स्वास्थ्य लाभों के बारे में जागरूक करना था। अंडा हाई प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत माना जाता है। इसमें विटामिन C को छोड़कर लगभग सभी जरूरी विटामिन और कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं। यही वजह है कि इसे दुनिया के सबसे सस्ते और सबसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों में गिना जाता है।

कुपोषित बच्चों को ध्यान में रखते हुए मिड डे मील में शामिल हुआ थे अंडे

बच्चों में कुपोषण कम करने के लिए कई राज्यों ने सरकारी स्कूलों के मिड-डे मील (PM POSHAN) में अंडे को शामिल किया था। लेकिन आज भी देश के कई राज्यों में बच्चों को स्कूल के भोजन में अंडा नहीं दिया जाता।

पश्चिम बंगाल में अंडे पर शुरू हुआ विवाद

पश्चिम बंगाल में नई भाजपा सरकार ने कोलकाता के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील तैयार करने और वितरण की जिम्मेदारी ISKCON (इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस) को सौंपने का फैसला किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बदलाव के बाद स्कूलों के मिड-डे मील में अंडा परोसा जाना बंद हो सकता है। हालांकि सरकार की ओर से इस पर अंतिम नीति स्पष्ट नहीं की गई है। 22 जून को राज्य का पहला बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने बताया कि कोलकाता में मिड-डे मील योजना के संचालन में ISKCON सहयोग करेगा।

TMC ने भाजपा पर लगाए पोषण से समझौते के आरोप

मिड-डे मील से अंडा हटाए जाने की संभावना पर पश्चिम बंगाल की राजनीति गरमा गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भाजपा सरकार पर बच्चों के पोषण से समझौता करने का आरोप लगाया है। टीएमसी के संयुक्त महासचिव डेरेक ओ'ब्रायन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि भाजपा सरकार बच्चों पर शाकाहार थोपने की कोशिश कर रही है और उन्हें जरूरी पोषण से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बंगाल की खाद्य संस्कृति अलग है और राज्य ऐसी सोच को स्वीकार नहीं करेगा।

अब सिर्फ 14 राज्यों में मिल रहा है मिड-डे मील में अंडा

एक समय देश के 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्कूलों के मिड-डे मील में अंडे दिए जाते थे। लेकिन अब यह संख्या घटकर 14 रह गई है। कई राज्यों में अंडे को लेकर अलग-अलग नीतियां लागू हैं, जबकि कुछ राज्यों ने इसे पूरी तरह मेन्यू से बाहर रखा है।

महाराष्ट्र ने भी बदली नीति

साल 2025 में महाराष्ट्र सरकार ने स्कूलों में अंडा वितरण के लिए मिलने वाली सरकारी आर्थिक सहायता बंद कर दी। हालांकि सरकार ने स्कूलों को अंडे परोसने की अनुमति दी है, लेकिन अब इसके लिए सरकारी फंड नहीं मिलेगा। यदि कोई स्कूल बच्चों को अंडा देना चाहता है तो उसे अपने स्तर पर संसाधनों की व्यवस्था करनी होगी।

नेताओं के चिकन मटन खाने पर घेरा

अधिवक्ता विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए नेताओं को चिकन मटन खाने पर घेरा, उन्होंने लिखा बच्चों के लिए अंडा नहीं… लेकिन नेताओं के लिए मछली-मटन ठीक है? अनुराग ठाकुर fish खाते हुए viral हो रहे हैं, जबकि स्कूलों में बच्चों से अंडा छीन लिया जा रहा है।

किन राज्यों में अभी भी मिलते हैं अंडे?

फिलहाल असम, ओडिशा, उत्तराखंड, बिहार और महाराष्ट्र समेत कुछ भाजपा शासित राज्यों में किसी न किसी रूप में अंडा वितरण कार्यक्रम जारी है। वहीं कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, मिजोरम और कई केंद्र शासित प्रदेशों में भी बच्चों को स्कूल के भोजन के साथ नियमित रूप से अंडे दिए जाते हैं। इन राज्यों में अंडे को राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि बच्चों के बेहतर पोषण का अहम हिस्सा माना जाता है।

किन राज्यों में नहीं मिलते अंडे?

उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, छत्तीसगढ़, गोवा, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, दिल्ली और त्रिपुरा जैसे कई राज्यों में स्कूलों के मिड-डे मील में नियमित रूप से अंडे नहीं दिए जाते। इन राज्यों में अंडा वितरण को लेकर कोई एक समान राज्यव्यापी नीति भी लागू नहीं है।

आखिर क्यों है अंडे पर विवाद?

अंडे को लेकर विवाद केवल पोषण का नहीं बल्कि सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से भी जुड़ा हुआ है। एक पक्ष का मानना है कि स्कूलों में बच्चों को पौष्टिक भोजन मिलना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए और अंडा इसका सस्ता एवं प्रभावी विकल्प है। वहीं दूसरा पक्ष शाकाहारी भोजन को प्राथमिकता देने की बात करता है। इसी वजह से अलग-अलग राज्यों में मिड-डे मील की नीतियां भी अलग-अलग हैं।

Published on:
26 Jun 2026 11:18 am