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पश्चिम बंगाल विधानसभा में अगले हफ्ते आ सकता है UCC बिल, शुभेन्दु सरकार कर रही बड़ी तैयारी

पश्चिम बंगाल की शुभेन्दु अधिकारी सरकार अगले हफ्ते विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) बिल पेश कर सकती है।
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भारत

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Rahul Yadav

Jun 25, 2026

Bangla language mandatory in west bengal government offices.

शुभेन्दु अधिकारी, मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल (फाइल फोटो - IANS)

West Bengal UCC Bill: पश्चिम बंगाल की शुभेन्दु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार अगले हफ्ते राज्य विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) बिल पेश कर सकती है। राज्य विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए सबसे प्रमुख चुनावी वादों में से एक को पूरा करने की दिशा में सरकार का यह एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

क्या है यूसीसी और इसके आने से क्या बदलेगा?

समान नागरिक संहिता (UCC) का सीधा उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून व्यवस्था लागू करना है चाहे वे किसी भी धर्म या आस्था के मानने वाले हों। इस कानून के लागू होने के बाद शादी, तलाक, संपत्ति के उत्तराधिकार, गोद लेने और विरासत जैसे संवेदनशील नागरिक मामलों में धर्म-आधारित पर्सनल लॉ की जगह सभी के लिए एक जैसे नियम प्रभावी हो जाएंगे।

यूसीसी की राह पर चलने वाला चौथा भाजपा शासित राज्य बन सकता है बंगाल


अगर यह बिल विधानसभा से पारित होकर कानून बनता है, तो आजादी के बाद पश्चिम बंगाल देश का चौथा ऐसा भाजपा शासित राज्य बन जाएगा जिसने समान नागरिक संहिता की दिशा में कदम बढ़ाया है। इससे पहले फरवरी 2024 में उत्तराखंड यूसीसी कानून पास करने वाला देश का पहला राज्य बना था। उसके बाद इसी साल की शुरुआत में गुजरात और असम की सरकारों ने भी अपनी-अपनी विधानसभाओं में इससे मिलते-जुलते कानून पेश किए थे।

छह महीने के भीतर वादा निभाने की कोशिश


पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान समान नागरिक संहिता को लागू करना भाजपा के प्रचार अभियान का एक मुख्य एजेंडा था। पार्टी का 'संकल्प पत्र' जारी करते समय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बंगाल की जनता से वादा किया था कि राज्य में भाजपा की सरकार बनने के छह महीने के भीतर यूसीसी लागू कर दिया जाएगा। अब शुभेन्दु सरकार उसी तय समय सीमा के भीतर इस बिल को पटल पर रखने की संभावना तलाश रही है।

ऐतिहासिक चुनावी जीत के बाद सरकार उठा सकती है कदम


हाल ही में संपन्न हुए बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इतिहास रचते हुए पहली बार राज्य की सत्ता पर पूर्ण बहुमत से कब्जा किया है। पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 15 साल पुराने शासन का अंत करते हुए घोषित 293 सीटों में से 207 पर प्रचंड जीत दर्ज की थी। बाद में फलता विधानसभा सीट पर हुए दोबारा मतदान (repoll) में भी भाजपा को जीत हासिल हुई, जिससे उसकी सीटों का आंकड़ा बढ़कर 208 हो गया। दूसरी ओर, ममता बनर्जी की टीएमसी महज 80 सीटों पर सिमट कर रह गई।