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West Bengal Assembly Elections 2026: बंगाल की महिलाएं वोट करने में सबसे आगे, महिला आरक्षण कार्ड चलेगा क्या?

West Bengal Assembly Elections 2026: पिछले चुनाव में किस आधार पर 294 में से 215 सीटें जीत गई थीं ममता?

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Apr 22, 2026
West Bengal Elections 2026: जीत की चाबी तो महिलाओं के हाथों में ही है। (चित्र एआई से बना है)

हाल के वर्षों में चुनावों में महिलाएं बतौर वोटर भरपूर भागीदारी करती रही हैं। यही वजह है कि पार्टियां अब महिलाओं को एकमुश्त और मजबूत वोट बैंक के रूप में देख रही हैं। पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव 2026 में भी ऐसा ही है। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और विरोधी भाजपा, दोनों ही महिलाओं के वोट पाने के लिए एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा रही हैं।

कई विश्लेषक मानते हैं कि केंद्र की भाजपा नीत सरकार ने महिला आरक्षण कानून में संशोधन का दांव भी इसी योजना के तहत चला था। संशोधन बिल पारित नहीं होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य भाजपा नेताओं ने साफ कहा कि मतदान के जरिए मतदाता तृणमूल कांग्रेस को इसकी सजा दें।

भाजपा ने इसे मुद्दा तो बनाया, लेकिन इसका कितना असर होगा, इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। लेकिन, पिछले चुनाव में लोगों ने जिन बातों को ध्यान में रखते हुए मतदान किया था, उस पर नजर डालने से बहुत सी बातें साफ हो सकती हैं।

चुनाव में ताकतवर हो रही महिला शक्ति

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में 2019 में प्रत्येक 1000 पुरुष मतदाताओं पर महिलाओं की संख्या 949 थी, जो 2021 में 961 और 2024 में 968 हो गई थी। ये महिलाएं वोट करने के लिए निकलती भी हैं।

वोट करने में पश्चिम बंगाल की महिलाएं देश भर में सबसे आगे हैं। 2021 के विधान सभा चुनाव में 82 प्रतिशत महिलाओं ने वोट डाला था। गुजरात और उत्तर प्रदेश में हुए विधान सभा चुनावों में मात्र 62 फीसदी महिलाओं ने वोट डाले थे।

पिछले विधान सभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में कुल 5,96,68,385 (85.2 प्रतिशत) वोट पड़े थे। इनमें से करीब आधे (48.5 प्रतिशत) मतदाताओं ने टीएमसी को वोट दिया था और 215 सीटें (294 में से) दी थीं। भाजपा को 38.4 प्रतिशत वोट और 77 सीटें मिली थीं। दोनों पार्टियों को महिलाओं के मिले वोट में करीब 13 प्रतिशत का अंतर था। टीएमसी को जहां महिलाओं के करीब 50 प्रतिशत वोट मिले, वहीं बीजेपी को लगभग 37 फीसदी महिलाओं ने वोट दिया था।

टीएमसी को महिला शक्ति का आशीर्वाद

CICERO 2024 Exit Poll के मुताबिक पुरुष मतदाताओं के मामले में जहां टीएमसी को बीजेपी की तुलना में चार प्रतिशत बढ़त मिली थी, वहीं महिला वोटर्स के बीच टीएमसी ने बीजेपी की तुलना में 10 प्रतिशत की बढ़त ली थी।

हर चौथे मतदाता ने आखिरी वक्त में तय किया कि वोट किसे देना है

2021 में लोकनीति-सीएसडीएस ने चुनाव के बाद एक सर्वे किया था। इसके मुताबिक 45.9 प्रतिशत मतदाताओं ने चुनाव प्रचार शुरू होने से पहले ही तय कर लिया था कि किसे वोट देना है। 12 फीसदी ने प्रचार के दौरान और 15 फीसदी ने मतदान के दिन ही यह फैसला किया था। मतदान से एक या दो दिन पहले मन बनाने वाले मतदाता नौ फीसदी थे।

वोट किन मुद्दों पर दिया था, जानिए

करीब एक-तिहाई (32.5 प्रतिशत) मतदाताओं ने विकास के नाम पर वोट दिया था, जबकि बदलाव के नाम पर वोट देने वाले केवल 4.8 प्रतिशत थे। 72.4 प्रतिशत मतदाताओं की राय में ममता सरकार का काम बेहतर हुआ था, जबकि 18.4 फीसदी की राय थी कि पिछली बार की तुलना में ममता सरकार का काम अच्छा नहीं रहा।

महिला सुरक्षा के मामले में 47.3 प्रतिशत मतदाताओं ने माना था कि ममता सरकार ने बेहतर काम किया।23.8 प्रतिशत ने खराब माना था।

सर्वे में 51.4 प्रतिशत मतदाताओं ने कहा था कि उन्हें 'दुआरे सरकार' योजना का फायदा नहीं मिला, जबकि 44.8 फीसदी ने लाभ मिलने की बात मानी थी।

सरकारी योजनाओं का फायदा उठाने वाले 86 फीसदी मतदाताओं ने इसका श्रेय राज्य सरकार को दिया। केंद्र सरकार को श्रेय देने वाले केवल पांच फीसदी मतदाता थे।

ममता सरकार के कामकाज से संतुष्टि के सवाल पर 38.4% लोगों ने खुद को 'पूरी तरह संतुष्ट' और 30.1% ने 'कुछ हद तक संतुष्ट' बताया। यह संतोष महिलाओं के बड़े वोट बैंक को टीएमसी की ओर झुकाने में मददगार रहा।

महिला वोट खींचने की एक वजह खुद ममता बनर्जी भी रहीं। सर्वे में शामिल 42.2 प्रतिशत लोगों ने ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री के रूप में अपनी पहली पसंद बताया। मतदान करते समय 9.5% मतदाताओं के लिए सबसे बड़ी वजह 'ममता बनर्जी' खुद थीं, न कि केवल पार्टी या स्थानीय उम्मीदवार।

टीएमसी की जीत में महिलाओं के लिए चलाई गई योजनाओं की भी बड़ी भूमिका रही: 'लक्ष्मीर भंडार' योजना में 2.40 करोड़ से ज्यादा महिलाएं रजिस्टर्ड हैं। इन्हें हर महीने सरकार की ओर से 1500 रुपये दिए जाते हैं। भाजपा ने वादा किया है कि अगर उसकी सरकार बनी तो हर महीने महिलाओं को 3000 रुपये दिए जाएंगे।

ममता सरकार की स्वास्थ्य साथी (Swasthya Saathi) योजना से 65.8% परिवारों को लाभ मिला। लाभार्थियों में से 94.4% ने इसका श्रेय सीधे राज्य सरकार (ममता सरकार) को दिया। सरकारी स्कूलों की स्थिति में सुधार को 48.5% लोगों ने स्वीकार किया।

खाद्य सुरक्षा (PDS): राशन योजना का लाभ 53.7% लोगों तक पहुंचा। राज्य सरकार को इसका श्रेय 52.1% ने दिया।

चुनाव के मुख्य मुद्दे: 32.5% मतदाताओं के लिए 'विकास' सबसे बड़ा मुद्दा था। बेरोजगारी (9.2%) और महंगाई (2.1%) जैसे मुद्दों के बावजूद, महिलाओं ने ममता बनर्जी के नेतृत्व और सुरक्षा के वादे पर अधिक भरोसा दिखाया।

ऐसे में महिला आरक्षण का मुद्दा वोट पर कितना असर डालेगा, यह चुनाव परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा।

बंगाल चुनाव में एक बड़ा M फैक्टर मुस्लिम भी

महिला और मुस्लिम के दम पर ही ममता बनर्जी तीन बार से मुख्यमंत्री हैं और चौथी बार बनने के लिए चुनाव मैदान में हैं। पिछले चुनाव में मुस्लिम फैक्टर उनके लिए कितना कारगर रहा था और इस बार कितना अहम है, यह जानने-समझने के लिए यह विश्लेषण पढ़ें।

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