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पश्चिम बंगाल में कैसे बढ़ गए मुसलमान? बांग्लादेश या घुसपैठ नहीं, हिंदुओं से जुड़ी है वजह

पश्चिम बंगाल चुनाव में मुस्लिम मतदाता काफी अहम हैं। राज्य में उनकी अहमियत बढ़ने की वजह जानिए।

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प्रतीकात्मक तस्वीर- AI जेनरेटेड

पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव में लगातार तीन बार से ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस जीतती आ रही है। इस जीत में दो 'M' की बड़ी भूमिका रही है- मुस्लिम और महिला। 2011 की जनगणना के मुताबिक राज्य का हर चौथा व्यक्ति मुसलमान (27 फीसदी) है। असम के बाद पश्चिम बंगाल देश का दूसरा सबसे बड़ा मुस्लिम आबादी वाला राज्य है।

कुछ रिसर्च के मुताबिक पश्चिम बंगाल में मुस्लिम आबादी का प्रतिशत देश के बंटवारे से पहले भी इसी के आसपास था। 1901-1941 के बीच यह 26 प्रतिशत था, 1951 में 19 प्रतिशत रह गया और 2011 में फिर 27 फीसदी पर आ गया।

पश्चिम बंगाल चुनाव में क्यों महत्वपूर्ण हैं मुसलमान

2011 के आंकड़ों के हिसाब से राज्य की करीब 70 फीसदी विधान सभा सीटें उन जिलों में पड़ती हैं, जहां मुस्लिम आबादी 20 फीसदी से ज्यादा है। करीब 17 फीसदी विधान सभा क्षेत्रों में मुस्लिम जनसंख्या 40 प्रतिशत से भी ज्यादा है।

जिलों में मुस्लिम आबादी 1971 में इन जिलों में विधान सभा सीटें (%)2011 में इन जिलों में विधान सभा सीटें (%)
50% से अधिक6.4511.56
40% से अधिक9.6816.67
30% से अधिक13.6242.18
20% से अधिक43.7368.71
10% से अधिक73.4890.82
10% से कम100100

टीएमसी को 2014 के लोक सभा चुनाव में 40 फीसदी मुस्लिम वोट मिले थे, लेकिन 2016 के विधान सभा चुनाव में 51 फीसदी मिले। 2019 के लोक सभा चुनाव में मुस्लिमों ने टीएमसी को एकमुश्त (70 फीसदी) वोट दिया। 2006 में उसे मात्र 22 फीसदी मुस्लिमों के वोट मिले थे। 13 साल में उसने मुस्लिम वोट तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ा लिया।

मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर, बीरभूम, साउथ 24 परगना- इन पांच जिलों में 85 मुस्लिम बहुल सीटें हैं। यहां मुस्लिम वोटर्स 35 से 66 फीसदी तक है। 2011 में इनमें से 36 सीटें टीएमसी ने जीती थीं, लेकिन 2021 में 75 सीटों पर तृणमूल ने कब्जा कर लिया था।

85 मुस्लिम बहुल सीटों पर 2021 में नतीजा कुछ ऐसा रहा था:

जिलाTMCBJPINCLEFTअन्यकुल
मुर्शिदाबाद20200022
मालदा8400012
उत्तर दिनाजपुर720009
बीरभूम10100011
दक्षिण 24 परगना30001031

2016 का परिणाम इस टेबल में देखिए:

जिलाTMCBJPINCLEFTअन्यकुल
मुर्शिदाबाद20200022
मालदा8400012
उत्तर दिनाजपुर720009
बीरभूम10100011
दक्षिण 24 परगना30001031

....और ये था 2011 का नतीजा

जिलाTMCBJPINCLEFTअन्यकुल
मुर्शिदाबाद10146122
मालदा1083012
उत्तर दिनाजपुर203319
बीरभूम6023011
दक्षिण 24 परगना26004131

इस बार मतदाता सूची के सघन पुनरीक्षण (SIR) की वजह से बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाता बाहर हो गए हैं। ऐसे में ममता बनर्जी के लिए चुनौती बढ़ गई है।

इससे समझा जा सकता है कि चौथी बार सत्ता में आने के लिए कमर कसने वालीं ममता बनर्जी के लिए मुस्लिम मतदाता कितना महत्व रखते हैं और विरोधी भाजपा के लिए ममता से मुस्लिम वोटर्स को दूर करना कितना जरूरी है। लेकिन, सवाल है कि पश्चिम बंगाल में इतने मुसलमान आ कहां से गए?

हिंदुओं की आबादी कम बढ़ी, इसलिए बढ़ गए मुसलमान

पश्चिम बंगाल में मुसलमानों की आबादी बढ़ने की वजह यह नहीं रही कि उन्होंने ज्यादा बच्चे पैदा किए, बल्कि यह रही कि हिंदुओं ने कम बच्चे पैदा किए। 'हिंदुस्तान टाइम्स' ने 1971 से 2011 के बीच पश्चिम बंगाल में जिलवार हिंदुओं और मुस्लिमों के कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (सीएजीआर) की तुलना की है। इसमें पाया गया कि इस बीच पश्चिम बंगाल में मुस्लिमों की आबादी बढ़ने की दर राष्ट्रीय औसत के बराबर ही रही, जबकि हिंदुओं की जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार थोड़ी कम रही।

घुसपैठिए वाले नरेटिव में कितना दम?

पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में मुस्लिमों को लेकर एक और नरेटिव चलता है कि ये बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं। बीजेपी इस नरेटिव को खास तौर पर चलती है। बंगाल और असम में वह इसे ज़ोर-शोर से मुद्दा बनाती रही है। झारखंड में भी बनाया था। लेकिन, इसमें कितनी सचाई है?

यह तो सच है कि मौजूदा बांग्लादेश से असम और पश्चिम बंगाल में शरणार्थी आए थे। लेकिन, यह भी सच है कि इन शरणार्थियों में हिन्दू भी थे।

बंगाल में आने वाले शरणार्थी केवल पूर्वी सीमाई इलाके से नहीं आए थे, बल्कि पश्चिमी क्षेत्र से भी आए थे। जनगणना के आंकड़ों से भी इसके संकेत मिलते हैं। पश्चिम बंगाल के 1.8 प्रतिशत लोगों ने अपनी मातृभाषा उर्दू बताई है। पश्चिम बंगाल के 19 में से छह जिलों में उर्दू बोलने वाले करीब 11 प्रतिशत हैं। कोलकाता में यह आंकड़ा 63 प्रतिशत है।

जिलाउर्दू भाषियों का प्रतिशत (%)
कोलकाता63.28
उत्तर दिनाजपुर19.00
वर्धमान13.78
दार्जिलिंग11.09
हावड़ा10.92
हुगली10.91
उत्तर 24 परगना8.83
पुरुलिया8.37
पश्चिम मेदिनीपुर5.59
जलपाईगुड़ी2.58
पूर्व मेदिनीपुर2.10
दक्षिण 24 परगना0.47
बांकुरा0.09
बीरभूम0.06
दक्षिण दिनाजपुर0.04
मुर्शिदाबाद0.04
नदिया0.02
मालदा0.02
कूच बिहार0.01
उर्दू मातृभाषा वाले किस धर्म के कितने लोग हैं, इसका आंकड़ा तो नहीं है। यह आंकड़ा उर्दू मातृभाषा बताने वाले को मुस्लिम आबादी से भाग देकर निकाला गया है। आंकड़ा 2011 की जनगणना पर आधारित है।

ये कुछ ऐसे संकेत हैं, जिनके आधार पर कहा जा सकता है कि पश्चिम बंगाल के ज़्यादातर मुसलमानों को बांग्लादेशी बताना सच को झुठलाना है।

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