
West Bengal OBC Amendment Bill 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा ने OBC आरक्षण से जुड़े पिछड़ा वर्ग संशोधन विधेयक 2026 को बहुमत से पास कर दिया है। इसी के साथ पारित विधेयक के कारण 113 अतिरिक्त जातियों को OBC सूची से बाहर कर दिया गया है। जबकि 1993 OBC आरक्षण के मूल कानून के तहत शामिल 66 जातियां पहले की तरह आरक्षण का लाभ लेती रहेंगी। इस फैसले को लेकर विधानसभा में जोरदार बहस हुई। सत्ता पक्ष तथा विपक्ष ने एक-दूसरे पर खूब आरोप लगाए।
पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री गौरीशंकर घोष ने विधानसभा में संशोधन विधेयक पेश किया। सदन में 186 सदस्यों ने बिल के पक्ष में मतदान किया। जबकि 17 विधायकों ने इसका विरोध किया। सरकार का कहना है कि पिछली सरकार ने राजनीतिक लाभ के कारण से 113 अतिरिक्त जातियों को OBC लिस्ट में शामिल किया था। इसलिए अब लिस्ट से उन सभी जातियों को हटाया जाएगा।
विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने सरकार के फैसले पर कई सवाल उठाए। ‘इंडियन सेक्युलर फ्रंट’ के विधायक पीरजादा मोहम्मद नौशाद ने विधेयक का विरोध किया। उन्होंने कहा- “सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, रिजर्वेशन लिमिट में किसी भी बदलाव के लिए खास एंपिरिकल डेटा या साइंटिफिक असेसमेंट की जरूरत होती है। लेकिन, राज्य सरकार बिना सही डेटा के OBC रिजर्वेशन कम करने की ओर बढ़ रही है। और इस मुद्दे को बिल में नहीं बताया गया है”
वहीं CPM विधायक मुस्तफिजुर रहमान ने मांग की कि पहले से OBC आरक्षण के आधार पर पिछली सरकार में सरकारी नौकरी पा चुके कर्मचारियों के अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रखे जाएं। जबकि टीएमसी विधायक बाबर अली ने भी पूछा कि सरकार ने किन तथ्यों और सर्वेक्षणों के आधार पर यह संशोधन किया। उन्होंने कहा कि कई राष्ट्रीय आयोग पहले ही कुछ समुदायों को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा मान चुके हैं।
दूसरी ओर सरकार ने कहा कि भविष्य में आयोग की सिफारिश मिलने पर किसी भी योग्य समुदाय को फिर से OBC सूची में शामिल किया जा सकता है। इसी के साथ विधानसभा ने पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग संशोधन विधेयक भी पास कर दिया। नए प्रावधानों के तहत राज्य सरकार आयोग से सलाह लेकर OBC आरक्षण का प्रतिशत तय करेगी। कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। साथ ही आयोग की सिफारिश के आधार पर विभिन्न OBC समुदायों का वर्गीकरण यानी कि श्रेणीबद्ध भी किया जा सकेगा। सरकार का दावा है कि नए कानून से OBC आरक्षण विधेयक से अधिक पारदर्शी बनी रहेगी।