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AMSS क्या है, कैसे करता है काम? जिससे ATC सिस्टम की तकनीकी खराबी के कारण दिल्ली में 800 फ्लाइट्स हुईं लेट

Delhi Flight Delays: दिल्ली हवाई अड्डे पर हवाई यातायात नियंत्रण प्रणाली में तकनीकी खराबी के कारण 800 से ज़्यादा उड़ानें विलंबित हुईं और कुछ रद्द कर दी गईं।
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Updated: 7 Nov 2025, 11:03 PM IST
Indira Gandhi International Airport
इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (Photo-ani)

दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGIA) पर शुक्रवार को हवाई यातायात नियंत्रण (ATC) सिस्टम में आई तकनीकी खराबी ने हवाई यात्रा को ठप कर दिया। स्वचालित संदेश स्विचिंग सिस्टम (AMSS) में गड़बड़ी के कारण 800 से अधिक उड़ानें विलंबित हो गईं, जबकि कुछ को रद्द भी करना पड़ा। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) ने बताया कि समस्या 6 नवंबर को शुरू हुई थी, लेकिन अब सिस्टम पूरी तरह चालू है। फिर भी, लंबित मामलों से कुछ देरी बनी हुई है।

AMSS क्या है?

AMSS, यानी ऑटोमेटेड मैसेज स्विचिंग सिस्टम, ATC का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह एक आधुनिक कंप्यूटरीकृत संदेश स्विचिंग सिस्टम है, जो एयरलाइंस, ATC और विभिन्न हवाई अड्डों के बीच संचालन संबंधी महत्वपूर्ण संदेशों का आदान-प्रदान करता है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, AMSS दैनिक आधार पर हजारों संदेश प्रसारित करता है, जिनमें उड़ान योजनाएं (फ्लाइट प्लान्स), मौसम अपडेट्स, विमान की हवा में या रनवे पर गतिविधियां और परिचालन परिवर्तन शामिल हैं। यह IP-आधारित सिस्टम ATC कंट्रोलर्स की स्क्रीन पर रीयल-टाइम डेटा उपलब्ध कराता है, जिससे टकराव टाला जा सके और सुरक्षित संचालन सुनिश्चित हो।

AMSS कैसे काम करता है?

AMSS ATC और एयरलाइंस के बीच एक प्रमुख संचार कड़ी के रूप में कार्य करता है। यह स्वचालित रूप से उड़ान योजना डेटा को ATC के ऑटो ट्रैक सिस्टम (ATS) तक पहुंचाता है, जो कंट्रोलर्स को विमान की स्थिति ट्रैक करने, टेकऑफ-लैंडिंग शेड्यूल बनाने और मौसम संबंधी अलर्ट देने में मदद करता है। सामान्य परिस्थितियों में, यह प्रक्रिया कुछ सेकंड में पूरी होती है, जिससे प्रति घंटे 60-70 फ्लाइट मूवमेंट्स संभव हो पाते हैं। यह एयरोनॉटिकल मैसेज हैंडलिंग सिस्टम (ATSMHS) का हिस्सा है, जो एंड सिस्टम्स के माध्यम से यूजर्स को डेटा कम्युनिकेशन सर्विस प्रदान करता है।

खराबी के कारण क्या हुआ?

6 नवंबर को AMSS में तकनीकी खराबी आने से उड़ान योजना संदेशों का प्रसंस्करण रुक गया। कंट्रोलर्स को हर प्रस्थान और आगमन को मैन्युअल रूप से हैंडल करना पड़ा-उड़ान विवरण लिखना, दूरी की गणना करना और वॉयस कम्युनिकेशन से समन्वय स्थापित करना। इससे प्रक्रिया धीमी हो गई, क्योंकि मैनुअल तरीका स्वचालित सिस्टम जितनी तेजी से काम नहीं करता। फ्लाइटराडार24 के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में 800+ फ्लाइट्स प्रभावित हुईं, जबकि मुंबई, अहमदाबाद, जयपुर और लखनऊ जैसे हवाई अड्डों पर भी रेनो प्रभाव पड़ा। इंडिगो, एयर इंडिया और स्पाइसजेट जैसी एयरलाइंस ने यात्रियों को एडवाइजरी जारी की।

Updated on:
7 Nov 2025, 11:03 PM IST
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