Agni 5 MIRV Test 2026: मिशन दिव्यास्त्र भारत का एडवांस एमआईआरवी मिसाइल कार्यक्रम है, जिसके तहत डीआरडीओ ने अग्नि-5 मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। इस तकनीक की मदद से एक ही मिसाइल कई अलग-अलग लक्ष्यों पर सटीक हमला कर सकती है।
Mission Divyastra DRDO: भारत लगातार अपनी सामरिक और मिसाइल ताकत को आधुनिक बनाने में जुटा है। इसी दिशा में ‘मिशन दिव्यास्त्र’ को भारत के सबसे अहम रक्षा कार्यक्रमों में माना जा रहा है। हाल ही में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने ओडिशा में एमआईआरवी तकनीक से लैस अग्नि श्रृंखला की मिसाइल का सफल परीक्षण किया। इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है, जिनके पास एक साथ कई लक्ष्यों पर हमला करने वाली अत्याधुनिक बैलिस्टिक मिसाइल तकनीक मौजूद है।
मिशन दिव्यास्त्र की शुरुआत मार्च 2024 में अग्नि-5 मिसाइल के परीक्षण के साथ हुई थी। इसके बाद अगस्त 2025 और मई 2026 में भी सफल परीक्षण किए गए। इन परीक्षणों ने भारत की रणनीतिक क्षमता को नई मजबूती दी है।
मिशन दिव्यास्त्र भारत के एमआईआरवी यानी मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल कार्यक्रम से जुड़ा हुआ है। इस तकनीक की मदद से एक ही मिसाइल से कई अलग-अलग वॉरहेड छोड़े जा सकते हैं, जो अलग-अलग लक्ष्यों पर सटीक हमला करने में सक्षम होते हैं।
सामान्य बैलिस्टिक मिसाइलें एक समय में केवल एक लक्ष्य को निशाना बनाती हैं, लेकिन एमआईआरवी तकनीक से लैस मिसाइलें कई लक्ष्यों को एक साथ भेद सकती हैं। यही वजह है कि इसे आधुनिक युद्ध प्रणाली में बेहद घातक और प्रभावी माना जाता है।
चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के बीच मौजूद सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए मिशन दिव्यास्त्र भारत के लिए काफी अहम माना जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों को एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम के जरिए रोका जा सकता है, लेकिन एमआईआरवी तकनीक से छोड़े गए कई वॉरहेड को एक साथ रोकना बेहद मुश्किल होता है।
यह तकनीक दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को भ्रमित करने और उसे भेदने में भी सक्षम मानी जाती है। इसके जरिए मिसाइलें डमी वॉरहेड भी ले जा सकती हैं, जिससे वास्तविक हमले को रोकना और कठिन हो जाता है।
डीआरडीओ मिशन दिव्यास्त्र के तहत अब तक तीन सफल परीक्षण कर चुका है। पहला परीक्षण मार्च 2024 में किया गया था। इसके बाद अगस्त 2025 और मई 2026 में भी इस तकनीक का सफल परीक्षण हुआ।
इन सफलताओं के बाद भारत अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों के उस एलीट समूह में शामिल हो गया है, जिनके पास एमआईआरवी तकनीक वाली मिसाइलें हैं।
डीआरडीओ लगातार अग्नि श्रृंखला की मिसाइलों को और आधुनिक बना रहा है। अग्नि प्राइम और अग्नि-5 के नए संस्करणों पर तेजी से काम किया जा रहा है। अग्नि-5 को कैनिस्टर आधारित लॉन्च सिस्टम से जोड़ा गया है, जिससे मिसाइल हर समय लॉन्च की स्थिति में रह सकती है।
मिशन दिव्यास्त्र के जरिए अब अग्नि-5 मिसाइल का एमआईआरवी संस्करण कम से कम तीन परमाणु वॉरहेड के साथ अलग-अलग लक्ष्यों पर हमला कर सकता है। जरूरत के हिसाब से इन वॉरहेड की संख्या को और बढ़ाया भी जा सकता है।
एमआईआरवी तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक मिसाइल से कई वॉरहेड छोड़े जा सकते हैं। ये सभी अलग-अलग दिशा और प्रक्षेप पथ में जाकर अपने लक्ष्य को भेदते हैं।
इस तकनीक में हाई सेंसर और एडवांस एवियोनिक्स सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे लक्ष्य पर बेहद सटीक हमला संभव हो पाता है। इसे जमीन और पनडुब्बी दोनों से लॉन्च किया जा सकता है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मिशन दिव्यास्त्र आने वाले समय में भारत की सामरिक ताकत को और मजबूत करेगा और एशिया में रणनीतिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगा।