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सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश: टैक्सी और बसों में पैनिक बटन अनिवार्य, बिना डिवाइस नहीं मिलेगा फिटनेस सर्टिफिकेट

Supreme Court on Road Safety: सुप्रीम कोर्ट ने सभी टैक्सी और सार्वजनिक वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) और पैनिक बटन अनिवार्य करने का निर्देश दिया है। अदालत ने साफ कहा कि बिना इन उपकरणों के किसी वाहन को फिटनेस सर्टिफिकेट या परमिट नहीं मिलेगा।

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भारत

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Rahul Yadav

May 14, 2026

Supreme Court on Road Safety

Supreme Court on Road Safety (AI Image)

SC on Road Safety: सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक परिवहन में यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को टैक्सी और अन्य पब्लिक सर्विस वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी) और पैनिक बटन अनिवार्य रूप से लगाने का निर्देश दिया है। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने बुधवार को कहा कि देश में एक प्रतिशत से भी कम परिवहन वाहनों में ट्रैकिंग डिवाइस लगे होना बेहद चिंताजनक है।

यात्रियों की सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना वीएलटीडी और पैनिक बटन वाले किसी भी सार्वजनिक वाहन को फिटनेस सर्टिफिकेट या परमिट नहीं दिया जाएगा। अदालत ने कहा कि इन सुविधाओं की जानकारी वाहन डेटाबेस ‘वाहन ऐप’ में भी दर्ज होनी चाहिए, ताकि रियल टाइम निगरानी संभव हो सके। यह आदेश सड़क सुरक्षा से जुड़े एक पुराने मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया।

पुराने वाहनों में भी लगाने होंगे उपकरण

अदालत ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि 21 दिसंबर 2018 तक पंजीकृत सभी सार्वजनिक वाहनों में भी वीएलटीडी और पैनिक बटन रेट्रोफिट किए जाएं। अदालत ने केंद्र सरकार से वाहन निर्माताओं के साथ बातचीत कर यह रिपोर्ट देने को भी कहा कि क्या भविष्य में सभी वाहन फैक्टरी स्तर पर ही इन उपकरणों के साथ बेचे जा सकते हैं। अदालत ने कहा कि महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए यह कदम जरूरी है।

स्पीड गवर्नर नियमों पर राज्यों को फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने के नियमों के पालन पर राज्यों की ढिलाई पर नाराजगी जताई और विस्तृत रिपोर्ट मांगी। अदालत ने कहा कि सभी वाहन निर्माताओं के लिए स्पीड लिमिटिंग डिवाइस लगाना अनिवार्य है।

तीन महीने में रोड सेफ्टी बोर्ड गठन का निर्देश

साथ ही, राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड के गठन में देरी पर कड़ी टिप्पणी करते हुए तीन महीने के भीतर बोर्ड गठित करने का अंतिम मौका दिया। उत्तर प्रदेश में बंद किए गए मोटर दुर्घटना मामलों को फिर खोलने के मुद्दे पर भी अदालत ने राज्य सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी।

सड़क सुरक्षा को लेकर लगातार बढ़ रही चिंता

देश में बढ़ते सड़क हादसों और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मामलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट लगातार राज्यों और परिवहन विभागों को सख्त निर्देश दे रहा है। अदालत ने कहा कि तकनीक के इस्तेमाल से सार्वजनिक परिवहन को ज्यादा सुरक्षित बनाया जा सकता है। वीएलटीडी और पैनिक बटन जैसी सुविधाओं से किसी भी आपात स्थिति में वाहन की लोकेशन तुरंत ट्रैक की जा सकेगी और पुलिस व प्रशासन को तेजी से मदद पहुंचाने में आसानी होगी। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि सड़क सुरक्षा नियमों के पालन में लापरवाही बरतने वाले राज्यों और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भविष्य में कड़ी कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता है।