
Shiv Sena Crisis:शिवसेना में यूबीटी संकट के बीच गुरुवार को संसद में एक महत्वपूर्ण संसदीय दल की बैठक कर रही है, लेकिन इस बीच शिव सेना में खलबली मच गई। उद्धव ठाकरे गुट के 6 सांसद उन्हें दगा दे गए। पार्टी के नौ लोकसभा सांसदों में से छह विरोधी खेमे के संपर्क में हैं। सुबह 11 बजे की बैठक की सूचना मिलने के बावजूद, कार्यवाही शुरू होने तक केवल तीन लोकसभा सांसद अनिल देसाई, अरविंद सावंत और राजभाऊ वाजे, - ही मीटिंग में मौजूद थे।बैठक में सांसद अनिल देसाई, अरविंद सावंत और राजभाऊ वाजे के साथ राज्यसभा सांसद संजय राउत भी शामिल हुए। इनमें संजय हरिभाऊ जाधव ,ओमप्रकाश ओमराजे, भूपालसिंह निंबालकर, ,संजय दीना पाटिल, भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे,संजय उत्तमराव देशमुख और नागेश बापूराव पाटिल अष्टिकर ने एकनाथ शिंदे गुट को समर्थन दे दिया है। आइए इन बागी सांसदों पर नजर डालते हैं।
मराठवाड़ा क्षेत्र में शिवसेना के कददावर नेता हैं संजय जाधव, वे परभणी से 2014, 2019 और 2024 के आम चुनावों में तीन बार सांसद बने और अभी सांसद हैं। जाधव बरसों संगठन में सक्रिय रहे हैं और उद्धव ठाकरे के करीबी माने जाते थे। वे सन 2004 से 2014 तक विधायक भी रहे। जाधव मराठवाड़ा क्षेत्र में शिवसेना के आक्रामक चेहरे और उप-नेता के रूप में सक्रिय रहे हैं। कुछ अरसे से पार्टी की गतिविधियों से नाराज थे और मातोश्री की बैठकों में नहीं पहुंचते थे।
दिवंगत कांग्रेस नेता पवनराजे निंबालकर के बेटे विश्वस्त निंबालकर उद्धव ठाकरे के विश्वस्त माने जाते रहे हैं और वे धाराशिव से सांसद हैं और लंबे समय से उद्धव ठाकरे के कट्टर समर्थक और वफादार थे। धाराशिव क्षेत्र में उनका मजबूत जनाधार रहा है।
मराठवाड़ा के प्रमुख नेता हैं ओमराजे निंबालकर, वे धाराशिव से दो बार के सांसद रहे हैं और सन 2009 से 2014 तक विधायक रह चुके हैं। महाराष्ट्र के गांवों के युवाओं उनका जनाधार अधिक है। गत रविवार को मातोश्री पर बुलाई गई बैठक में शामिल नहीं हुए थे और पारिवारिक कारणों का हवाला देकर बैठक से दूर रहे। ऐसा कयास है कि पिता संबंधी अदालती मामलों में सुरक्षा नहीं मिली और उन्होंने नाराज हो कर यह कदम उठाया।
यवतमाल-वाशिम क्षेत्र के संजय देशमुख शिव सेना की जमीनी रणनीति बनाने में अहम भूमिका निभाते रहे हैं, वे विदर्भ क्षेत्र के एक बड़े सियासी खिलाड़ी रहे और सन 1999 से 2009 तक दो बार निर्दलीय विधायक भी और 2002-2004 के दौरान महाराष्ट्र के खेल मंत्री भी रहे।
हिंगोली के पहली बार के लोकसभा सांसद नागेश पाटिल पार्टी को शिव सेना का वफादार माना जाता था और उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए उद्धव ठाकरे के साथ काम किया, मगर उन्होंने भी उद्धव का साथ नहीं निभाया। पहले वह 13वीं महाराष्ट्र विधानसभा में विधायक रह चुके हैं। एमकॉम तक शिक्षित नागेश पाटिल का नांदेड़ और हिंगोली क्षेत्रों में गहरा जनाधार है। उन्होंने भी मातोश्री की हालिया बैठकों से दूरी बना ली थी।
मुंबई उत्तर पूर्व ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से की थी। वे 2004 से 2009 तक विधायक और 2009 से 2014 तक सांसद रहे। बाद में 2019 में वे अविभाजित शिवसेना में शामिल हो गए। वे पार्टी से नाराज चल रहे थे।
शिव सेना के भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे सांसद हैं। वे ठाकरे के करीबी माने जाते थे और महाराष्ट्र के शिरडी जिले का प्रतिनिधित्व करते हैं और शिवसेना (यूबीटी) राजनीतिक दल के सदस्य हैं। कुछ अरसे से मातोश्री से नाराजगी के कारण उन्होंने इस स्थल से किनारा करना शुरू कर दिया था।