
जयराम रमेश (Photo - ANI)
साल 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा महज 240 सीटों पर सिमट गई थी। बहुमत के आंकड़े के लिए सहयोगियों का सहारा लेना पड़ा था। जदयू, टीडीपी, शिवसेना और लोजपा जैसे सहयोगी दलों के समर्थन पर नरेंद्र मोदी ने 293 सांसदों के समर्थन जुटाए, लेकिन दो साल बाद अब हालात बदलते हुए दिखाई दे रहे हैं। संसद के दोनों सदनों में NDA की स्थिति पहले से बेहतर है। वहीं, गठबंधन की राजनीति को संभालने के लिए अधिक विकल्प मिल गए हैं। हालांकि, अभी भी परिसीमन बिल को पास कराने के लिए मोदी सरकार के पास संसद में दो तिहाई बहुमत नहीं है। कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी इसलिए ये जोड़तोड़ की जुगत में लगी हुई है।
कांग्रेस नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में गृह मंत्री की बड़ी बेइज्जती हुई। एक संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं कर पाए। उन्होंने साहब (पीएम नरेंद्र मोदी) को वादा किया था कि ये पारित होगा। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के नाम पर ये परिसीमन का बिल लेकर आए थे।
उन्होंने कहा कि संविधान संशोधन विधेयक के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। 2 तिहाई बहुमत मतलब 362 सांसद की जरूरत थी। गृह मंत्री को केवल 298 सांसदों का समर्थन मिला। यानी उनके दावों के बावजूद पूरे प्रयासों के बावजूद उन्हें बहुमत नहीं मिला। अब वे तोड़फोड़ की राजनीति में लगे हैं। उनका मकसद दो तिहाई बहुमत है।
उद्धव ठाकरे की शिवसेना के 9 में से 6 सांसदों ने बगावत कर दी है। इन सभी ने बुधवार सुबह 9.30 बजे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को शिंदे की शिवसेना में विलय के लिए चिट्ठी भेजी, लेकिन अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की गई है। वहीं, आज सुबह शिवसेना MLC चंद्रकांत रघुवंशी ने कहा कि महाराष्ट्र में ऑपरेशन टाइगर हुआ है। उबाठा के छह सांसदों ने एकनाथ शिंदे पर भरोसा जताया है और हमारे साथ आ गए हैं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी की पार्टी में भी बड़ी फूट हुई। पार्टी के 60 से अधिक विधायक और 20 सांसद बागी हो गए। काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में ये सभी बागी सांसदों ने NCPI में विलय कर लिया। साथ ही, इन सभी ने मोदी सरकार को समर्थन देने का ऐलान किया।
वहीं, राज्यसभा में आम आदमी पार्टी टूट गई। आप के सात सांसद बीजेपी में चले गए। 10 में सात सांसदों ने खुद को भारतीय जनता पार्टी में मिलाने का ऐलान किया। दो तिहाई सांसदों के विलय के कारण दल-बदल कानून भी उन पर लागू नहीं हुआ। पाला बदलने वालों में आप संयोजक अरविंद केजरीवाल के प्रमुख सहयोगी राघव चड्ढा व संदीप पाठक भी थे।
Updated on:
18 Jun 2026, 12:20 PM IST
Published on:
18 Jun 2026, 12:16 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.