
वैसे तो बीजेपी के लिए कोई भी चुनाव कम महत्व का नहीं होता, लेकिन 2027 में होने वाला उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव वाकई बड़ा महत्वपूर्ण है। यह देश के सबसे बड़े और राजनीतिक रूप से सबसे अहम राज्य का चुनाव होगा। यहां भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में आने का लक्ष्य लेकर चुनाव में उतरेगी। चुनाव की अहमियत इससे भी समझी जा सकती है कि पार्टी ने राज्य का प्रभारी विनोद तावड़े को बनाया है। उनकी मदद करने के लिए राष्ट्रीय सचिव जगदीश ईश्वरभाई पटेल को सह-प्रभारी बनाया गया है।
63 साल के तावड़े (जन्म: 20 जुलाई, 1963) की राजनीतिक शुरुआत भले ही महाराष्ट्र से हुई हो, लेकिन उन्होंने घाट-घाट का पानी पीया है। वह महाराष्ट्र की राजनीति के बड़े नाम हैं। कई विश्लेषक उन्हें महाराष्ट्र से राष्ट्रीय स्तर पर लाए जाने की एक वजह यह भी मानते हैं कि बीजेपी महाराष्ट्र में देवेंद्र फड़णवीस के टक्कर का एक और नेता खड़ा नहीं करना चाहती थी।
तावड़े ने एबीवीपी से शुरुआत की और महाराष्ट्र भाजपा में कई अहम पदों पर काम किया। वह सबसे कम उम्र के मुंबई भाजपा अध्यक्ष रहे हैं। गोपीनाथ मुंडे और प्रमोद महाजन जैसे दिग्गज महाराष्ट्र की राजनीति में उनके गुरू थे। महाजन 2004 में ही तावड़े को मुलुंड से विधान सभा भेजना चाहते थे, लेकिन किसी कारण से ऐसा नहीं हो सका। तब कुछ ही समय बाद तावड़े को विधान परिषद भेजा गया था।
2014 में पहली बार बोरिवली से विधायक बनने से पहले तावड़े तीन बार विधान परिषद सदस्य रहे। वह विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष भी रहे। पहली बार विधायक बनने के बाद वह देवेंद्र फड़णवीस की सरकार में मंत्री भी बने। इतना सब कुछ होने के बाद भी 2019 के महाराष्ट्र विधान सभा चुनाव में भाजपा ने तावड़े को टिकट नहीं दिया।
2020 में तावड़े को महाराष्ट्र से निकाल कर राष्ट्रीय राजनीति में लाया गया और राष्ट्रीय सचिव बनाया गया। अगले ही साल (नवंबर 2021) उन्हें महासचिव चुना गया। 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में उन्हें एनडीए की राष्ट्रपति चुनाव प्रबंधन समिति में रखा गया। 2024 में भाजपा ने उन्हें सदस्यता अभियान का संयोजक बनाया। इससे पहले 2022 में बिहार का भी प्रभार दिया। 2025 का बिहार विधान सभा चुनाव उन्हीं के प्रभार में लड़ा गया, जिसमें बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी और अंततः बिहार में भाजपा का सीएम बना। बिहार विधान सभा चुनाव के कुछ महीने बाद ही (मार्च 2026) भाजपा ने तावड़े को राज्य सभा भेजा। अब 17 अगस्त को अध्यक्ष नितिन नवीन ने उन्हें बतौर राष्ट्रीय महासचिव अपनी टीम में लिया और अगले ही दिन उत्तर प्रदेश का प्रभारी बना दिया।
तावड़े का उत्तर प्रदेश से नाता कोई नया नहीं है। 2022 के चुनाव में भी उन्हें उत्तर प्रदेश के साथ-साथ उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में संयोजक बनाया गया था। तब पंजाब को छोड़ कर सभी राज्यों में बीजेपी ही जीती थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रेडियो पर जो 'मन की बात' कार्यक्रम करते हैं, उसके लिए बीजेपी की ओर से को-ऑर्डिनेशन देखने का काम भी तावड़े को ही दिया गया। वह कार्यक्रम में उठाए जाने वाले मुद्दे भी सुझाते रहे हैं। मतलब तावड़े जेपी नड्डा की टीम में रहे, अमित शाह के समन्वय में काम किया, पीएम मोदी के लिए काम किया और अब नितिन नवीन की टीम में हैं। वह दिल्ली, हरियाणा सहित कई राज्यों के प्रभारी रह चुके हैं।
2024 के चुनाव के वक्त तावड़े एक बड़े विवाद में फंस गए थे। उनका एक वीडियो सामने आया था, जिसमें उन्हें कथित रूप से पैसे बांटते हुए पकड़े जाने के बाद विरोधी पक्ष के लोग हंगामा करते दिख रहे थे। उनकी डिग्री को लेकर भी विरोधी सवाल उठाते रहे हैं। तावड़े ने 1984 में पुणे के ध्यानेश्वर विद्यापीठ एजुकेशनल ट्रस्ट से इंजीनियरिंग का कोर्स किया है। विरोधी आरोप लगाते हैं कि उनकी डिग्री गैर मान्यताप्राप्त यूनिवर्सिटी से है। हालांकि, तावड़े का इस पर जवाब होता है कि उन्होंने कब कहा कि मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से ली है!