
जयराम रमेश (Photo - ANI)
Elephant corridor Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने हाथियों के पारंपरिक रास्तों यानी एलिफेंट कॉरिडोर में किसी भी तरह की रुकावट या बाधा खड़ी करने को पूरी तरह से अस्वीकार्य कर दिया है। कोर्ट ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु मंत्रालय को साफ निर्देश दिया है कि वह देशभर में यह जांचने के लिए सर्वे कराए कि कहीं किसी राज्य में एलिफेंट कॉरिडोर में बाधाएं या अवरोध तो खड़े नहीं किए गए हैं। कोर्ट के इस फैसले के बाद कांग्रेस नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि खनन और अन्य परियोजनाओं की वजह से हाथियों के आवास और गलियारे लगातार व्यवस्थित ढंग से नष्ट किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस दिशा में जरूरी सर्वे पहले से मौजूद हैं, लेकिन मोदी सरकार में इन्हें बचाने और संरक्षित करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं है।
दरअसल, हाथियों के कॉरिडोर को लेकर एक मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति ज्योयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने स्पष्ट किया कि फसलों और आजीविका के नुकसान को रोकने के नाम पर कोई भी राज्य हाथियों के रास्ते में बाधा नहीं खड़ा कर सकता है। पीठ ने कहा कि हाथी गलियारों में किसी भी प्रकार की बाधा या अवरोध बनाना स्वीकार्य नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वन्यजीवों के मार्ग में रुकावट डालने का कोई औचित्य नहीं बनता। कोर्ट ने कहा कि हाथियों के झुंड लंबी दूरी तय करने के आदी होते हैं और सिर्फ इसलिए कि फसलें बर्बाद हो रही हैं, कोई राज्य उनके रास्ते में बैरिकेड नहीं लगा सकता।
न्यायमूर्ति बागची ने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां आग के गोलों (फायरबॉल) और नुकीली कीलों के इस्तेमाल का चलन इसलिए है क्योंकि हाथी नेपाल से आकर पश्चिम बंगाल होते हुए झारखंड और अन्य राज्यों की ओर बढ़ते हैं। वहीं मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने हरियाणा के यमुनानगर क्षेत्र का जिक्र करते हुए बताया कि वहां से हाथी उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की ओर पलायन करते हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी राज्य इनके मार्ग को अवरुद्ध नहीं कर सकता।
शीर्ष अदालत ने हाथियों को खदेड़ने के लिए किसी भी तरह के फायरबॉल या मशाल के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है और राज्य प्रशासन को इस निर्देश को लागू करने के लिए कहा है।
पीठ ने केंद्र सरकार को छह सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि पर्यावरण मंत्रालय पहले से ही विभिन्न राज्यों से गुजरने वाले हाथी गलियारों को बाधा-रहित और निर्बाध बनाए रखने के लिए अनिवार्य दिशा-निर्देश जारी कर चुका है। बावजूद इसके, कुछ स्थानीय कारणों से इन गलियारों में रुकावटें, अवरोध और बाधाएं पैदा हो गई हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार और मंत्रालय को नए सिरे से सर्वे कराने और इसकी व्यापक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया, जिसमें यह भी बताना होगा कि ऐसी बाधाओं को रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
Updated on:
18 Aug 2026 03:49 pm
Published on:
18 Aug 2026 03:49 pm
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