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‘शराब पीकर स्कूल आता था प्रिंसिपल’, विरोध के बाद हटाया गया, अब 2 नए शिक्षकों की मांग पर अड़े अभिजीत दीपके

महाराष्ट्र के हिंगोली में प्रिंसिपल पर शराब पीकर स्कूल आने का आरोप लगा। अभिजीत दीपके ने बताया कि प्रिंसिपल हटाए गए, अब 2 शिक्षकों की मांग पर आंदोलन जारी है।
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मुंबई

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Rahul Yadav

Aug 18, 2026

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अभिजीत दीपके (File Photo: IANS)

Abhijeet Dipke School Thik Karo Protest: महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में सरकारी स्कूल की बदहाली और प्रधानाचार्य पर लगे आरोपों को लेकर CJP का ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान चर्चा में है। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके के मुताबिक स्कूल के प्रधानाचार्य शराब पीकर आते थे और बच्चों के सामने शराब पीकर सो जाते थे। उन्होंने बताया कि विरोध के बीच अब उन्हें पद से हटाए जाने की जानकारी मिली है। हालांकि, ग्रामीणों का आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है।

बच्चों के सामने शराब पीने का आरोप

अभिजीत दीपके ने कहा कि स्कूल के प्रधानाचार्य पर शराब पीकर स्कूल आते थे। उनके मुताबिक, प्रधानाचार्य बच्चों के सामने शराब पीते थे और कक्षा में ही सो जाते थे।दीपके ने कहा कि उन्होंने मांग की थी कि प्रधानाचार्य को हटाया जाए नहीं तो आंदोलन किया जाएगा। इसी दौरान उन्हें जानकारी मिली कि प्रधानाचार्य को पद से हटा दिया गया है। उन्होंने इसे गांव के लोगों की बड़ी जीत बताया और आंदोलन में शामिल ग्रामीणों की सराहना की है।

अब दो और शिक्षकों की नियुक्ति की मांग

दीपके ने कहा कि प्रधानाचार्य को हटाए जाने के बाद भी आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। ग्रामीण अब स्कूल में दो और शिक्षकों की नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक दोनों शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो जाती तब तक गांव के लोग पीछे नहीं हटेंगे। दीपके ने भी ग्रामीणों के साथ आंदोलन में बैठे रहने की बात कही है।

सरकारी स्कूलों में बेंच और पानी की भी मांग

अभिजीत दीपके ने कहा कि ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान सिर्फ एक स्कूल तक सीमित नहीं है। CJP देशभर के सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर अभियान चला रही है।उन्होंने कहा कि जिन सरकारी स्कूलों में बेंच नहीं हैं वहां सबसे पहले बेंच उपलब्ध कराने की मांग की जाएगी। उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से सवाल किया कि सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी मिलने के बावजूद कई स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं हैं। दीपके ने कहा कि कई सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए पानी, बेंच और डिजिटल क्लासरूम जैसी सुविधाएं तक नहीं हैं।

अधिकारियों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ेंगे तो हालात समझ आएंगे

CJP संस्थापक ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ते हैं जहां उन्हें बेहतर सुविधाएं मिलती हैं, जबकि गांव के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है।

दीपके ने तंज करते हुए कहा कि अगर शिक्षा विभाग के अधिकारियों के बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में करा दिया जाए तो उन्हें ग्रामीण बच्चों की समस्याओं का पता चलेगा और स्कूलों की स्थिति जल्द सुधर सकती है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार और शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है। CJP का अभियान इस मुद्दे को लेकर आगे भी जारी रहेगा।