Keralam Chief Minister: केरलम में मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस में मंथन तेज हो गया है। दिल्ली में मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी की लंबी बैठक के बाद भी CM चेहरे पर फैसला नहीं हो सका। वीडी सतीशन, केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला रेस में बताए जा रहे हैं।
Keralam CM: केरलम के मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान तेज हो गई है। इस पद के लिए कांग्रेस नेता वीडी सतीशन, केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला रेस में हैं। हालांकि, शनिवार को दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की लंबी बैठक के बाद भी राज्य के मुख्यमंत्री पद के लिए किसी नेता के नाम की घोषणा नहीं हो सकी।
दिल्ली में शनिवार को केरलम कांग्रेस की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए दीपा दासमुंशी ने कहा कि शाम 4 बजे से लंबी चर्चा चली, जिसमें कई नेताओं ने मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से अलग-अलग मुलाकात कर केंद्रीय नेतृत्व से मार्गदर्शन मांगा।
उन्होंने कहा कि पार्टी को केरलम में भारी बहुमत मिला है, लेकिन पिछले 2-3 दिनों में कुछ अति-उत्साही कार्यकर्ताओं द्वारा अराजक घटनाओं की खबरें सामने आई हैं, जो कांग्रेस की संस्कृति को नहीं दर्शातीं। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि सही समय आने पर आलाकमान अंतिम फैसला करेगा और हम उसी का इंतजार कर रहे हैं।'
इस बीच, वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने कहा कि केरलम कांग्रेस नेतृत्व की बैठक लगभग चार घंटे तक चली। उन्होंने इसे सकारात्मक बैठक बताते हुए कहा कि सभी नेताओं ने पार्टी आलाकमान के सामने अपने विचार रखे। बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी के साथ सभी नेताओं ने अपनी राय साझा की और अंतिम फैसला आलाकमान ही करेगा।
केरलम में कांग्रेस के सामने मुख्यमंत्री पद को लेकर चुनौती बनी हुई है। इसकी वजह यह है कि UDF गठबंधन के अन्य सहयोगी दल भी अपने-अपने नेताओं को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं। ऐसे में कांग्रेस के लिए सर्वसम्मति से फैसला लेना आसान नहीं दिख रहा है।
केरलम कांग्रेस के सभी विधायकों ने एक प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें कहा गया है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर अंतिम निर्णय कांग्रेस नेतृत्व करेगा। इसका मतलब है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी जो भी फैसला करेंगे, सभी विधायक उसे स्वीकार करेंगे।
आपको बता दें कि 23 मई तक केरल में नई सरकार का गठन और मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण होना जरूरी है। यदि तय समय सीमा तक ऐसा नहीं होता है, तो राज्यपाल संवैधानिक प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई कर सकते हैं।