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नौकरियां पैदा करने के लिए सिर्फ निवेश काफी नहीं, मजबूत आर्थिक व्यवस्था क्यों है जरूरी?

Employment Generation: निर्मला सीतारमण ने विश्व बैंक की बैठक में रोजगार बढ़ाने, निजी निवेश, MSME, स्टार्टअप, सस्ती फंडिंग और सरकारी कामकाज में AI के इस्तेमाल पर जोर दिया।
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Oct 16, 2026
Sustainable Job Creation news
AI Image-(ChatGpt)

Sustainable Job Creation: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार रोजगार पैदा करने के लिए अलग-अलग योजनाओं या अकेले प्रयासों से काम नहीं चलेगा, बल्कि इसके लिए मजबूत आर्थिक व्यवस्था तैयार करनी होगी। उन्होंने कहा कि टिकाऊ रोजगार के लिए अर्थव्यवस्था का मजबूत, समावेशी और गुणवत्तापूर्ण विकास जरूरी है। इसमें बुनियादी ढांचे, वित्तीय सेवाओं, कौशल विकास और आसान नियमों की अहम भूमिका है। सीतारमण ने यह बात थाईलैंड के बैंकॉक में विश्व बैंक की विकास समिति की 114वीं पूर्ण बैठक में कही। इस बैठक में उन्होंने विश्व बैंक में भारत की गवर्नर के रूप में हिस्सा लिया।

उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय ऊर्जा बाजार में दबाव, व्यापार में बिखराव, जलवायु संबंधी चुनौतियों और तेजी से बदलती तकनीक का सामना कर रही है। ऐसे समय में बेहतर वेतन वाली और उत्पादक नौकरियां गरीबी कम करने और समृद्धि को अधिक लोगों तक पहुंचाने का सबसे प्रभावी रास्ता हैं।

रोजगार पैदा करने में निजी क्षेत्र की बड़ी भूमिका

वित्त मंत्री ने कहा कि ऊर्जा और रोजगार के अवसरों तक लोगों की पहुंच बढ़ाना, बड़े स्तर पर सड़क, परिवहन और डिजिटल बुनियादी ढांचे का विकास करना तथा वित्तीय सेवाओं को अधिक लोगों तक पहुंचाना जरूरी है। इससे उत्पादकता बढ़ाने और बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने निजी क्षेत्र को विकास की प्रक्रिया का प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि ज्यादातर नौकरियां निजी कंपनियों और कारोबारों के जरिए पैदा होंगी। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) तथा स्टार्टअप की इसमें बड़ी भूमिका होगी। सीतारमण ने कहा कि निजी निवेश जुटाना जरूरी है, लेकिन इसकी सफलता केवल इस बात से नहीं मापी जानी चाहिए कि कितना पैसा निवेश के लिए जुटाया गया। यह भी देखना चाहिए कि उससे कितनी नौकरियां पैदा हुईं और उत्पादकता में कितना सुधार हुआ।

विश्व बैंक से सस्ती और आसान फाइनेंसिंग पर जोर

सीतारमण ने कहा कि विश्व बैंक की विकास रणनीति में प्रतिस्पर्धी दरों पर वित्त उपलब्ध कराना प्राथमिकता बनी रहनी चाहिए। इसके लिए स्थानीय मुद्रा में कर्ज देने, गारंटी से जुड़े बेहतर विकल्प उपलब्ध कराने और लेनदेन की लागत घटाने जैसे कदम जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि मध्यम आय वाले देशों के लिए वित्तीय सहायता सस्ती, भरोसेमंद और आसानी से उपलब्ध होनी चाहिए। विश्व बैंक को विकास साझेदार के रूप में ऐसी व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए, जिससे परियोजनाओं और कारोबारों के लिए पूंजी जुटाना आसान हो। वित्त मंत्री ने विश्व बैंक के ज्ञान और विशेषज्ञता से जुड़े संसाधनों की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि शहरीकरण, पर्यटन, कृषि निर्यात और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में बाजार की कमियों को दूर करने के लिए विश्व बैंक समूह प्रभावी भूमिका निभा सकता है।

सरकारी कामकाज में AI के इस्तेमाल पर जोर

सीतारमण ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल से विकासशील देशों की प्रशासनिक क्षमता बढ़ सकती है। उन्होंने विश्व बैंक से अपने कामकाज और ज्ञान से जुड़े कार्यक्रमों में AI को अधिक महत्व देने की बात कही। उनका कहना था कि AI के जरिए सरकारी संस्थानों की क्षमता मजबूत करने की संभावनाओं पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।

Published on:
16 Oct 2026 03:00 am