
Xi Jinping India Visit 2026: नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी ने भारत-चीन संबंधों को फिर से वैश्विक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। लेकिन इस यात्रा की एक और बात खास है। शी अकेले नहीं आए हैं। उनके साथ चीन की सत्ता और विदेश नीति के दो बेहद प्रभावशाली चेहरे Cai Qi और Wang Yi भी पहुंचे हैं। दोनों की मौजूदगी को बीजिंग की रणनीतिक प्राथमिकताओं के अहम संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार को 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने नई दिल्ली पहुंचे। करीब सात साल बाद भारत आए शी की इस यात्रा पर पहले से ही दुनिया की नजरें टिकी हैं। इसी बीच उनके प्रतिनिधिमंडल में कै Qi (Cai Qi) और वांग यी (Wang Yi) की मौजूदगी ने यात्रा का महत्व और बढ़ा दिया है। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ (Xinhua) के अनुसार, दोनों वरिष्ठ नेता शी के साथ भारत आए हैं।
कै Qi चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में शामिल हैं और पार्टी की केंद्रीय समिति के आम कार्यालय के निदेशक हैं। यह पद उन्हें चीन के शीर्ष राजनीतिक तंत्र में बेहद महत्वपूर्ण बनाता है। वह सात सदस्यीय Politburo Standing Committee के सदस्य भी हैं। उनकी जिम्मेदारियों के कारण उन्हें शी जिनपिंग का प्रभावशाली आंतरिक राजनीतिक सहयोगी और व्यवहारिक तौर पर चीफ ऑफ स्टाफ माना जाता है।
शी और कै Qi के राजनीतिक संबंध भी काफी पुराने हैं। दोनों का करियर चीन के फुजियान और झेजियांग प्रांतों में एक-दूसरे के कार्यकाल से जुड़ा रहा है। वर्ष 2017 में कै Qi को पोलितब्यूरो में जगह मिली और इसके बाद उनका राजनीतिक कद लगातार बढ़ता गया।
जून 2026 में उन्हें चीन के सेंट्रल पार्टी स्कूल और राष्ट्रीय शासन अकादमी की जिम्मेदारी भी दी गई। Reuters के अनुसार, इस नियुक्ति ने पार्टी के संगठनात्मक, वैचारिक और प्रशासनिक ढांचे में उनकी भूमिका को और मजबूत किया।
दूसरी ओर वांग यी चीन की विदेश नीति का जाना-पहचाना चेहरा हैं। वह विदेश मंत्री होने के साथ-साथ चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के पोलितब्यूरो सदस्य और Central Commission for Foreign Affairs के Office के निदेशक हैं।
2013 में विदेश मंत्री बनने के बाद से वांग यी ने चीन के अमेरिका, रूस, यूरोप और एशिया सहित दुनिया के प्रमुख देशों के साथ संबंधों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत-चीन संवाद में भी उनका नाम लगातार सामने आता रहा है। हाल के वर्षों में सीमा विवाद के बाद दोनों देशों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
शी जिनपिंग की भारत यात्रा ऐसे समय हुई है जब नई दिल्ली और बीजिंग रिश्तों को धीरे-धीरे सामान्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच सीमा तनाव के बाद व्यापार, सीधी उड़ानों और उच्चस्तरीय संवाद को फिर गति देने की कोशिशें हुई हैं।
अब सबकी नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की प्रस्तावित द्विपक्षीय बैठक पर है। ऐसे में कै Qi की राजनीतिक मौजूदगी और वांग यी की कूटनीतिक भूमिका इस बात का संकेत देती है कि दिल्ली में चीन की तरफ से सत्ता और विदेश नीति दोनों स्तरों पर गंभीर प्रतिनिधित्व मौजूद है।