
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी (Photo-IANS)
China Border Disputes: ब्रिक्स समिट में भाग लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आ गए हैं। शी जिनपिंग का विमान पालम एयरपोर्ट पर लैंड हुआ। इसी बीच चीन को लेकर कांग्रेस की प्रतिक्रिया सामने आई है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि भारत और चीन को वास्तविक नियंत्रण रेखा से जुड़े सीमा विवाद के समाधान के लिए व्याहारिक और ठोस प्रयास करने होंगे।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका को मजबूत करने के लिए सीमा विवाद का समाधान बेहद जरूरी है।
कांग्रेस सांसद तिवारी ने कहा कि चीन की 12 देशों के साथ जमीनी सीमाएं हैं और उसने इनमें से 10 देशों के साथ सीमा संबंधी सवालों को सुलझा लिया है। कई मामलों में उसने अपनी शुरुआती क्षेत्रीय मांग के करीब एक-तिहाई हिस्से पर भी समझौता किया है। भूटान के साथ भी सीमा विवाद सुलझाने की प्रक्रिया जारी है। ऐसे में अब भारत ही बचता है।
उन्होंने कहा कि भारत और चीन, दोनों एशिया की प्रमुख शक्तियां हैं और उन्हें यह विचार करना चाहिए कि वास्तविक नियंत्रण रेखा से जुड़े क्षेत्रीय विवादों को सुलझाने के लिए आखिर क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
तिवारी ने भारत-चीन सीमा वार्ता के लिए चल रही विशेष प्रतिनिधि प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से इस प्रक्रिया में अपेक्षित प्रगति नहीं हो रही है।
उन्होंने कहा कि हाल में बीजिंग में हुई बैठक के बाद जारी बयान में भी इस बात का संकेत था कि सीमा विवाद के समाधान के तौर-तरीकों और संदर्भ की शर्तों को लेकर अभी तक पूरी तरह सहमति नहीं बन पाई है।
कांग्रेस सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि अगर भारत और चीन अपने संबंधों को आगे बढ़ाना चाहते हैं और दोनों देशों को लगता है कि वैश्विक मामलों में उनकी बड़ी भूमिका होनी चाहिए, तो सीमा विवाद का समाधान जरूरी है। इसके लिए दोनों देशों को बेहद गंभीर, ठोस और व्यावहारिक प्रयास करने होंगे।
मनीष तिवारी ने ब्रिक्स के बदलते स्वरूप पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में हुए पहले शिखर सम्मेलन से लेकर दिल्ली में हो रहे 18वें शिखर सम्मेलन तक ब्रिक्स ने लंबा सफर तय किया है।
हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि विस्तार के बाद क्या ब्रिक्स को अभी भी ‘ग्लोबल साउथ’ का प्रतिनिधि मंच कहा जा सकता है।
तिवारी ने कहा कि चीन करीब 20 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था है और औद्योगिक क्रांति की लगभग सभी अत्याधुनिक तकनीकों में उसकी महत्वपूर्ण बढ़त है। उन्होंने सवाल किया कि क्या चीन को वास्तव में ग्लोबल साउथ का हिस्सा माना जा सकता है। इसी तरह उन्होंने सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को लेकर भी सवाल उठाया।
Updated on:
12 Sep 2026, 2:08 PM IST
Published on:
12 Sep 2026, 2:08 PM IST
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