
Xi Jinping Tibet Visit BRICS 2026: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले दिल्ली में तिब्बत का मुद्दा फिर गरमा गया है। मजनू का टीला में रहने वाले तिब्बती समुदाय ने विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों के हाथों में बैनर और पोस्टर थे। उन्होंने चीन की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। साथ ही ‘एथनिक यूनिटी लॉ एंड प्रोग्रेस’ कानून को रद्द करने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि शी जिनपिंग भारत आ रहे हैं। ऐसे में वे अपनी बात दुनिया तक पहुंचाना चाहते हैं। उन्होंने चीन की सरकार पर तिब्बत में लंबे समय से दमन करने का आरोप लगाया। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि वे चीन के शासन का विरोध कर रहे हैं। उनकी पहली मांग तिब्बत की आजादी है। इसके साथ ही उन्होंने नए कानून को वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि तिब्बत में राजनीतिक कैदियों को भी रिहा किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि तिब्बत के लोगों को अपनी संस्कृति और पहचान के साथ जीने का अधिकार मिलना चाहिए।
तिब्बती समुदाय ने चीन से बातचीत शुरू करने की भी मांग की है। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, चीन को 14वें दलाई लामा और सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन के प्रतिनिधियों से बिना किसी पूर्व शर्त के बातचीत करनी चाहिए। उनका कहना है कि बातचीत के जरिए तिब्बत के मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सकता है। समुदाय ने भारत के नेताओं से भी इस मुद्दे पर समर्थन की अपील की।
‘तिब्बती पार्लियामेंट-इन-एक्साइल’ के सदस्य वांगड्यू दोरजी ने कहा कि उनका विरोध BRICS बैठक के दौरान शी जिनपिंग के भारत आने को लेकर है। उन्होंने कहा कि तिब्बती समुदाय शी जिनपिंग का स्वागत नहीं करता। उन्होंने भारत की सुरक्षा को भी तिब्बत के मुद्दे से जोड़ते हुए कहा कि तिब्बत की आजादी जरूरी है।
तिब्बती समुदाय ने चीन के नए ‘एथनिक यूनिटी लॉ एंड प्रोग्रेस’ कानून पर भी सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक, यह कानून अलग-अलग जातीय समुदायों को एक बड़ी राष्ट्रीय पहचान में शामिल करने की कोशिश है। प्रदर्शनकारियों (आलोचकों) का आरोप है कि इससे तिब्बती जैसी अल्पसंख्यक समुदायों की अलग पहचान प्रभावित हो सकती है। उनकी भाषा, संस्कृति और धार्मिक परंपराओं पर भी असर पड़ने की चिंता जताई गई है।
तिब्बत की निर्वासित सरकार के प्रमुख सिक्योंग पेनपा त्सेरिंग ने भी समुदाय को चीन में हो रहे बदलावों पर नजर रखने को कहा है। उन्होंने नए कानून को लेकर चिंता जताई है।
बता दें निर्वासित सरकार (Government in Exile) का मतलब होता है…एक ऐसा राजनीतिक समूह या संगठन है जो किसी देश की वैध सरकार होने का दावा करता है, लेकिन अपने देश के क्षेत्र से बाहर किसी अन्य विदेशी देश में रहता है और अपने मूल देश पर वास्तविक नियंत्रण रखने में असमर्थ होता है।
वहीं तिब्बती समुदाय का कहना है कि असली शांति दबाव से नहीं आ सकती। उनका मानना है कि सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का सम्मान जरूरी है। इसी मांग को लेकर उन्होंने शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले दिल्ली में अपनी आवाज बुलंद की।