
Yasin Malik: जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के चेयरमैन यासीन मलिक ने कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट की हत्या के मामले में खुद को निर्दोष बताया है। मलिक ने बुधवार को श्रीनगर में टाडा और पोटा मामलों की सुनवाई कर रहे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के समक्ष 25 पन्नों का हलफनामा दाखिल किया है। इसमें उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है। मलिक ने कहा कि सरला भट्ट की हत्या के समय वह गंभीर रूप से घायल थे। वह बेहोशी की हालत में थे और उनका इलाज चल रहा था। ऐसे में हत्या का आदेश देने या साजिश रचने का आरोप गलत है।
सरला भट्ट की 19 अप्रैल 1990 को हत्या कर दी गई थी। इस मामले में स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने 29 जून 2026 को चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें यासीन मलिक को भी आरोपी बनाया गया है। मलिक ने कहा कि घटना के 30 साल से ज्यादा समय बाद उन्हें इस मामले में आरोपी बनाया गया। उन्होंने इसे राजनीतिक परिस्थितियों और फैसलों का नतीजा बताया। मलिक ने कहा कि उन्हें इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है। मलिक का हलफनामा उनके वकील आदिल पंडित ने अदालत में दाखिल किया। मामले में अब 19 सितंबर 2026 को जवाब दाखिल किया जाना है।
यासीन मलिक ने हलफनामे में एक और अहम बात कही है। उन्होंने कहा कि वह इस मामले में मुकदमे का विरोध नहीं करेंगे। उन्होंने अपने लिए मृत्युदंड की मांग की है। हालांकि, मलिक ने सरला भट्ट की हत्या में अपनी भूमिका से साफ इनकार किया है। उनका कहना है कि जब हत्या हुई, तब वह खुद जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे थे।
हलफनामे में यासीन मलिक ने अपनी पत्नी मुशाल मलिक और बेटी रजिया सुल्ताना का भी जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि उनकी पत्नी उनकी वजह से पूरी जिंदगी विधवा के रूप में बिताएं। मलिक ने कहा कि वह चाहते हैं कि मुशाल अपनी जिंदगी की नई शुरुआत करें। इसके लिए उन्होंने निकाह के रिश्ते से अलग होने का फैसला लेने की बात कही है। बता दें कि यासीन मलिक 2019 से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं। इस मामले की अगली तारीख 19 सितंबर 2026 तय की गई है।