
Satyendar Jain Bail News
Satyendar Jain Corruption Case: आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को दिल्ली जल बोर्ड से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में अदालत से बड़ी राहत मिली है। ANI के X पर किए गए पोस्ट के अनुसार, राउज एवेन्यू कोर्ट ने 3 सितंबर को जमानत मंजूर कर दी। यह फैसला ऐसे समय आया है जब जैन की गिरफ्तारी और टेंडर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर जांच एजेंसी और बचाव पक्ष के बीच तीखी कानूनी बहस चल रही थी। अब इस आदेश के बाद मामले की अगली कानूनी लड़ाई पर सबकी नजर रहेगी।
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश दिग्विनय सिंह ने सत्येंद्र जैन को जमानत देने का आदेश सुनाया। जैन को दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने 18 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया था। यह कार्रवाई दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी STP से जुड़े टेंडरों में कथित अनियमितताओं की जांच के तहत हुई थी।
ACB का आरोप है कि STP के अपग्रेडेशन और क्षमता बढ़ाने से जुड़े टेंडर में ऐसी तकनीकी शर्तें रखी गईं, जिनसे एक खास तकनीक और निजी कंपनी को कथित तौर पर लाभ मिला। एजेंसी ने टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर, आपराधिक साजिश और कथित रिश्वत लेनदेन की जांच की है।
सत्येंद्र जैन को दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने गिरफ्तार किया था। अब राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी है। हालांकि, यह जमानत मामले में आरोपों से पूरी तरह बरी होने के बराबर नहीं है। जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।
इस मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू गिरफ्तारी का समय भी रहा। बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी थी कि FIR दर्ज होने के करीब 27 महीने बाद जैन को गिरफ्तार किया गया और वह जांच में सहयोग करते रहे हैं। वहीं ACB ने गिरफ्तारी का विरोध करते हुए दावा किया कि जांच अभी महत्वपूर्ण चरण में है और जैन की भूमिका से जुड़े साक्ष्यों की पड़ताल जरूरी है।
गौरतलब है कि गिरफ्तारी के अगले दिन, 19 अगस्त को अदालत ने जैन की गिरफ्तारी को अवैध घोषित करने की मांग खारिज कर दी थी और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
जांच एजेंसी के अनुसार, STP परियोजनाओं के दायरे और तकनीकी मानकों में कथित बदलाव से सरकारी खजाने पर करीब 123 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय प्रभाव पड़ा। ACB ने यह भी आरोप लगाया कि टेंडर की शर्तों को इस तरह बदला गया कि प्रतिस्पर्धा सीमित हो और एक विशेष तकनीकी प्रदाता को फायदा मिले।
मामला मई 2024 में दिल्ली सरकार के विजिलेंस निदेशालय की शिकायत के बाद दर्ज FIR से शुरू हुआ था। जैन के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और IPC की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई।
अब जमानत मिलने के बावजूद मामला खत्म नहीं हुआ है। जांच और आगे की न्यायिक कार्यवाही जारी रहेगी, इसलिए आने वाले दिनों में अदालत में होने वाली सुनवाई इस पूरे प्रकरण की अगली दिशा तय करेगी।
Updated on:
03 Sept 2026 02:58 pm
Published on:
03 Sept 2026 02:38 pm
