
Neemuch News : गुरु और शिष्य के रिश्ते की अहमियत आज के दौर में क्या है, इसकी एक बेहद भावुक और दिल छू लेने वाली तस्वीर मध्य प्रदेश के नीमच जिले के जावद विकासखंड से उस वक्त सामने आई, जब यहां के प्राथमिक विद्यालय विजियातलाई में 28 साल की सेवा के बाद एक शिक्षक रिटायर हुए। उनके विदाई समारोह के दौरान जबवो अपने घर लौटने लगे तो पूरा स्कूल आंसुओं से भीग गया।
सबसे भावुक नजारा उस समय देखने को मिला, जब स्कूली बच्चे अपने गुरुजी के पैरों से लिपट गए और रोते हुए बोलने लगे, 'सर, हम आपको घर नहीं जाने देंगे…' तो कोई बोल रहा था, 'सर आप हमें छोड़कर मत जाइए।' ये विदाई समारोह सिर्फ एक सरकारी कर्मचारी की सेवानिवृत्ति नहीं थी, बल्कि यह 28 सालों के उस निस्वार्थ प्रेम, समर्पण और तपस्या की विदाई थी, जिसने एक पूरी पीढ़ी का भविष्य संवारा है।
बता दें कि, जावद विकासखंड (झांतला संकुल) के प्राथमिक विद्यालय विजियातलाई में शिक्षक बाबूलाल तुरंगरिया (झांतला) की सेवानिवृत्ति का कार्यक्रम रखा गया था। जब विदाई की बेला आई और गुरुजी स्कूल के दरवाजे से बाहर कदम रखने लगे तो स्कूली छात्रों के सब्र का बांध टूट पड़ा। सैकड़ों छात्र - छात्राएं दौड़ते हुए उनके पास पहुंचे और उन्हें चारों ओर से घेर लिया।
कोई बच्चा उनका हाथ पकड़कर रो रहा था तो कोई उनके पैरों से लिपटकर बैठ गया। मासूम आंखों से बहते आंसुओं को देखकर वहां मौजूद साथी शिक्षकों, अभिभावकों और ग्रामीणों के गले भी रुंध गए। माहौल इतना भावुक हो गया कि, खुद गुरुजी बाबूलाल तुरंगरिया भी अपने आंसू रोक नहीं पाए। उन्होंने रोते हुए बच्चों को गले लगाया, उनके सिर पर हाथ फेरा और काफी देर तक समझा - बुझाकर उनके उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया। भारी मन और सजल नेत्रों के साथ बच्चों ने अपने सबसे प्रिय शिक्षक को विदाई दी।
शिक्षक बाबूलाल तुरंगरिया का सफर शिक्षा विभाग में एक मिसाल है। उन्होंने 01 अप्रैल 1998 को इसी प्राथमिक विद्यालय विजियातलाई से अपने करियर की शुरुआत की थी और 28 साल 3 महीने की अनवरत सेवा के बाद 31 जुलाई 2026 को उसी स्कूल की दहलीज से रिटायर हुए। आज के समय में जहां लोग जल्द से जल्द अपना तबादला सुगम जगहों पर कराना चाहते हैं, वहीं शिक्षक बाबूलाल ने अपना पूरा जीवन एक ही गांव के बच्चों को समर्पित कर दिया। यही कारण था कि, सिर्फ स्कूल ही नहीं, बल्कि पूरा गांव उनकी विदाई पर भावुक हो उठा।
ग्रामीणों और साथी शिक्षकों के अनुसार, बाबूलाल तुरंगरिया कभी सिर्फ एक 'कर्मचारी' नहीं रहे। वे बच्चों के लिए एक मार्गदर्शक और पिता समान अभिभावक भी साबित हुए। उनका स्वभाव बेहद सरल और मिलनसार था। जब भी उन्हें लगता कि, कोई बच्चा आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई में पिछड़ रहा है तो वे अपनी जेब से उस बच्चे के लिए किताबें, कॉपियां, पेन और अन्य जरूरी सामग्री ले आते। सुख हो या दुख, वे गांव के हर परिवार के साथ खड़े नजर आते थे।
विदाई समारोह की शुरुआत मां सरस्वती और संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षक-शिक्षिकाओं, जनप्रतिनिधियों, पूर्व छात्रों और बड़ी संख्या में मौजूद ग्रामीणों ने गुरुजी के कार्यकाल की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्हें शॉल, श्रीफल, स्मृति चिन्ह और पुष्पहार पहनाकर पूरे सम्मान के साथ विदाई दी गई।
किसी ने सच ही कहा है कि एक शिक्षक की असली कमाई उसका वैतन नहीं, बल्कि उसके बच्चों का प्यार और सम्मान होता है। प्राथमिक विद्यालय विजियातलाई के इस विदाई समारोह ने ये साबित कर दिया कि, एक सच्चा गुरु सिर्फ किताबें नहीं पढ़ाता, बल्कि बच्चों के दिलों में रिश्तों और संस्कारों की ऐसी अमिट छाप छोड़ जाता है जो ताउम्र जिंदा रहती है। शिक्षक बाबूलाल तुरंगरिया इस स्कूल से तो विदा हो गए, लेकिन यहां के बच्चों, स्टाफ और ग्रामीणों के दिलों में हमेशा याद रखे जाएंगे।