नीमच

Farmer News: ऐसा क्या हुआ कि किसानों को देना पड़ी कांगे्रेस नेताओं को यह चेतावनी

केवल वोट देने तक ही दिया जाता है इन गांवों के किसानों को महत्व
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Jan 31, 2019
Farmer Protest News In Hindi Neemuch
गाडगिल सागर बांध से पानी नहीं छोड़े जाने से इस तरह सूखा पड़ा है स्टापडेम।

नीमच. जब जब चुनाव आते हैं सत्ता हासिल करने के लिए किसानों को लुभावने वादे कर बरगलाया जाता है। कई बार परिणाम भी नेताओं के पक्ष में आ जाते हैं, लेकिन इन गांवों के किसानों के साथ इसके उलट हो रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि इन गांवों के किसानों को चाहे भाजपा हो या फिर कांग्रेस केवल मतदान तक ही महत्व देती है। इसके बाद उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है। अब ऐसा नहीं होगा। इन गांवों के किसानों ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दे दी है कि यदि उनकी सुनवाई नहीं हुई तो राजनीतिक दल के नेता परिणाम भुगतने को भी तैयार हो जाएं।

वर्षों से कर रहे हैं यह मांग, नहीं सुन रहे नेता
गाडगिल सागर बांध से लगे जीरन तहसील के चार गांवों में इस समय सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं है। क्षेत्र के ग्रामीण लम्बे समय से मांग कर रहे थे कि गाडगिल सागर बांध से पानी दिया जाए, लेकिन किसानों की कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। यहां तक कि जनप्रतिनिधि भी किसानों की पीड़ा नहीं सुन रहे हैं, जबकि सबकी राजनीति ही किसानों के वोट बैंक से चल रही है। इस बार ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि बांध से पानी नहीं दिया गया तो बारिश में बांध का पानी क्षेत्र में नहीं छोडऩे देंगे। जीरन तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम पालसोड़ा, फतेहनगर व देवीपुरा के किसानों की कृषि भूमि पालसोड़ा नदी के पास है। जब बारिश में गाडगिल सागर बांध भर जाता है और उसके गेट खोले जाते हैं तब पानी इन गांवों से लगे खेतों में बाढ़ की स्थिति निर्मित हो जाती है। पिछले साल सितंबर १८ में भी ऐसे ही हालात निर्मित हुए थे। तब बांध के गेट खोलने पर पानी खेतों में भर गया था। खेतों में पड़ी कटी हुई फसल पानी में बह गई थी। इसकी सूचना जीरन तहसीलदार को ग्रामीणों ने दी थी। तहसीलदार ने मौका पर पहुंचकर पंचनामा बनाया था। साथ ही उचित कार्रवाई का आश्वासन भी दिया था कि बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई के लिए रबी सीजन में फसल के लिए एक बार बांध के गेट खुलवाकर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराकर दिलवाएंगे। रबी सीजर लगभग आधे से अधिक बीत चुका है, लेकिन अब तक कहीं सुनवाई नहीं हुई। खेतों में खड़ी फसल सूखने की स्थिति में पहुंच गई है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल बारिश में जब बांध भर जाता है तब ही पालसोड़ा क्षेत्र की याद आती है। आज तक पालसोड़ा क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी का संकट है तो न प्रशासन और न ही जनप्रतिनिधि सुन रहे हैं। पालसोड़ा, फतेहनगर, देवीपुरा, सिमखेड़ा की करीब १५० हेक्टेयर कृषि भूमि नहर कमांड एरिया में आती है, लेकिन आज तक नहर द्वारा इस क्षेत्र में पानी नहीं छोड़ा गया। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार चारों गांव की नदी से लगी जमीन हो नहर के कमांड एरिया में जोड़े जाने की मांग की गई, लेकिन किसी ने इस ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि नहर का पानी सिंचाई के लिए नहीं दिया गया तो इस बार बारिश में जब डेम लबालब भर जाएगा तब हमें मजबूरन पुलिया पर बैठकर विरोध प्रदर्शन करना पड़ेगा। तब हम बांध के गेट नहीं खोलने देंगे और न ही बांध का पानी अपने खेतों में नहीं जाने देंगे।

फसलें सूख रही हैं
बरसात में भी अत्यधिक बारिश होने की वजह से बांध के गेट खोलने से हमारी फसलें चौपट हो जाती हैं। अभी हमें पानी नहीं मिलने की वजह से फसलें सूख रही हैं। कई बार आवेदन देने के बाद भी कहीं सुनवाई नहीं हो रही है।
- राधेश्याम पाटीदार, किसान ग्राम पालसोड़ा

हमारी पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं
बांध के गेट नहीं खोले जाने की वजह से हमारी फसलें बर्बाद हो रही है। बरसात में बांध के गेट खोलने पर हमारी फंसले नष्ट हो जाती है। इससे दोनों मौसम में हमें नुकसान उठाना पड़ता है। हमारी पीड़ा कोई सुनने वाला भी नही है।
- जगदीश व्यास, किसान ग्राम पालसोड़ा

क्षमता से अधिक दबाव है नहर पर
गाडगिल डेम से मंदसौर जिले के किसानों को क्षमता से अधिक पानी दिया जा रहा है। नहर की क्षमता एक हजार 993 हेक्टेयर है और पानी 2 हजार 200 हेक्टेयर के मान से छोड़ा जा रहा है। पहले ही नहर पर काफी दबाव है। ऐसे में पालसोड़ा क्षेत्र में पानी कैसे दे सकते हैं। पालसोड़ा क्षेत्र के किसानों ने अपने यहां बने स्टापडेम के पानी का पूरा उपयोग कर लिया। अब स्टापडेम सूख गया तो गाडगिल डेम से पानी छोडऩे की मांग कर रहे हैं। मंदसौर जिले के किसान इसको लेकर सहमति नहीं देंगे। इसका एक समाधान पक्की नहर बनाकर निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
- टीके परमार, कार्यपालन यंत्री जलसंसाधन मंदसौर

मंदसौर जलसंसाधन के क्षेत्राधिकार का मामला है
पालसोड़ा क्षेत्र के अंतर्गत गाडगिल डेम का पानी छोड़े जाने को लेकर वहां के किसानों का एक प्रतिनिधि मंडल कलेक्टर से मिलने आया था। कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन की प्रति जलसंसाधन विभाग मंदसौर के कार्यपालन यंत्री को भेज दी थी। वहां से जो जवाब आया था उससे भी कलेक्टर को अवगत करा दिया गया है। पालसोड़ा क्षेत्र में गाडगिल डेम से पानी छोडऩे का मामला पूरी तरह मंदसौर जलसंसाधन के क्षेत्राधिकार का मामला है।
- जीएस डाबर, कार्यपालन यंत्री जलसंसाधन नीमच

Published on:
31 Jan 2019 01:36 pm